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राजनांदगांव : तीन माह से उधार का राशन… 93 हजार बच्चों को सिर्फ चावल-दाल ही परोस रहेराजनांदगांव :

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जिले के प्राइमरी और मिडिल सरकारी स्कूलों में तीन माह से उधार के राशन पर मध्याह्न भोजन योजना चल रही है। स्कूलों में भोजन बनाने वाली रसोइयों को मानदेय और इस योजना से जुड़े ऑपरेटरों को भी तीन माह से वेतन नहीं मिल सका है। फंड नहीं होने के कारण महिला समूह उधार का राशन लेकर मध्यान्ह भोजन बनाने और बच्चों की थाली में परोसने को मजबूर हैं। महिला समूह ग्रामीणों से सहयोग मध्याह्न भोजन तैयार कर रही हैं। मानदेय नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति और योजना का हाल बेहाल है।

हालात यह हैं कि 93 हजार बच्चों की थाली में व्यंजन कम, चावल-दाल से काम चल रहा है। जिले के 1206 स्कूलों में 4 करोड़ 80 लाख रुपए तीन माह की बकाया राशि का भुगतान नहीं हो पाया है। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र से इसका फंड पहुंचता है। लेकिन तीन माह से बीईओ स्तर पर इसकी राशि नहीं पहुंची है। इस कारण महिला समूहों को भोजन बनाने में उपयोग आने वाली सामग्री की उधार में खरीदी करनी पड़ती है। कुछ स्कूलों में शिक्षक योजना को संचालित करने सहयोग कर रहें है तो कहीं ग्रामीण साग-सब्जी की व्यवस्था गांव स्तर पर कर रहे है। बच्चों को स्कूलों तक लाने उन्हें पढ़ाई से जोड़े रखने की पहल की जा रही है

थाली से पूड़ी, सब्जी, सलाद पापड़, अचार सब गायब मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों को गर्म और पौष्टिक भोजन परोसा जाता है। मेनू के मुताबिक चावल, दाल, पूड़ी प्रतिदिन अलग-अलग हरी सब्जियां एवं सलाद, पापड़, अचार परोसा जाना है। तीन माह से फंड के अभाव में बच्चों की थाली से धीरे-धीरे व्यंजन कम होते जा रहें है। केवल गर्म चावल और दाल के अलावा एक ही तरह की हरी सब्जी से काम चलाया जा रहा है। मध्यान्ह भोजन योजना की मॉनिटरिंग करने वाले अफसर की फंड नहीं होने के कारण भोजन की क्वालिटी एवं क्वांटिटी में सुधार लाने की दिशा में कुछ नहीं कर पा रहे हैं।

शासन स्तर पर पत्राचार किए हैं, मिला आश्वासन शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। जल्द ही केन्द्र सरकार का फंड एवं राज्य सरकार का अंश मिलाकर जिले में राशि भेजे जाने का उच्च अफसरों ने आश्वासन दिया है। राजेश कुमार सिंह, डीईओ, राजनांदगांव

महंगाई का दौर: इतनी कम राशि में कैसे होगा सुपोषण राजनांदगांव जिले के चार ब्लॉकों में 791 प्राइमरी स्कूलों में 55190 एवं 415 मिडिल स्कूलों में 37970 बच्चे मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ लेते है। प्राथमिक स्कूल में एक बच्चे को भोजन कराने प्रतिदिन के हिसाब से 5 रुपए 59 पैसा एवं मिडिल स्कूल में प्रति छात्र प्रति दिन 8 रुपए 70 पैसा मिलता है। प्रति स्कूल में 2 रसोइए हैं उनका 1000 से बढ़ा कर 2300 रुपए मानदेय होता है, लेकिन समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है। चारों ब्लॉकों योजना से जुड़े 8 ऑपरेटर्स को कलेक्टर दर से वेतन देना है लेकिन उन्हें भी तीन माह से वेतन नहीं मिला है। बच्चों को स्कूलों तक लाने उन्हें पढ़ाई से जोड़े रखने के साथ सुपोषित करने सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना संचालित की जा रही है।

स्टेट से राशि जारी नहीं की गई, 3 माह से भुगतान नहीं राजनांदगांव जिले में प्राइमरी और मिडिल स्कूलों को मिला कर 1206 स्कूलों में 93160 बच्चों को प्रतिदिन मध्यान्ह भोजन कराया जाता है। प्रतिमाह करीब 1 करोड़ 60 रुपए की राशि मिलती है। लेकिन तीन माह का 4 करोड़ 80 लाख रुपए बकाया है। अविभाजित राजनांदगांव जिले की बात करें तो करीब 5200 रसोइया भोजन बनाने का काम करती हैं। इस योजना में केन्द्र सरकार 60 एवं राज्य सरकार 40 फीसदी फंड देती है। तीनों जिले में तीन माह का 10 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान अटका हुआ है। जिससे बच्चों के निवाले में कटौती हो गई। बताया गया कि स्टेट से ही राशि जारी नहीं की गई है।

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