रायपुर-हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को लॉकडाउन अवधि में ट्यूशन फीस लेने का अधिकार दिया है। इसके बाद स्कूल संचालकों ने वसूली की मनमानी शुरू कर दी है। स्कूलों ने जो फीस साल 2019 में तीन माह के लिए ली थी, अब वे उसे ही ट्यूशन फीस की किश्त बता रहे हैं। इसके लिए स्कूलों की ओर से पैरेंट्स को मोबाइल पर मैसेज भेजकर फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है।
दरअसल, पिछले सत्र 2019-20 के लिए प्राइवेट स्कूलों ने प्रत्येक तीन माह के लिए फीस जमा कराई थी। इस फीस में ट्यूशन के साथ ही खेल, भवन विकास शुल्क, लाइब्रेरी, कंप्यूटर क्लास सहित अन्य शुल्क जुड़े थे। अब सिर्फ ट्यूशन फीस लेनी है, ऐसे में स्कूलों ने पिछले साल की तुलना में इस बार इसी में 30 फीसदी की वृद्धि कर दी। जबकि हाईकोर्ट ने फीस वृद्धि करने पर रोक लगाई है।
ट्यूशन फीस- 3100 बिल्डिंग मेंटेनेंस फीस – 2500 स्पोर्ट्स फीस – 650 स्मार्ट क्लास फीस – 300 गार्डन फीस – 100पुअर स्टूडेंट फंड – 100 साल 2020 में ट्यूशन फीस- 6750
रायपुर के मोवा स्थित एक निजी स्कूल ने पिछले वर्ष 5800 रुपए फीस ली गई। इस वर्ष इसे ही ट्यूशन फीस बना दिया है। जबकि पिछले सत्र की ट्यूशन फीस 2300 रुपए ही ली गई थी।कक्षा 6वीं में 2019 में ट्यूशन फीस 3100 रुपए ली गई थी, जो कि इस वर्ष बढ़ाकर 4600 रुपए ली जा रही है। ऐसे में कोर्ट के आदेश के बावजूद फीस में या तो वृद्धि की गई है या फिर पूरी शुल्क ही वसूली जा रही है।कक्षा दूसरी में पिछले वर्ष ट्यूशन फीस 2900 रुपए थी, जो कि इस बार 4350 रुपए कर दी गई है। इसी प्रकार केजी-2 में भी ट्यूशन फीस 2900 रुपए की बजाय 4350 रुपए वसूली जा रही है। सीबीएसई के नॉर्म के अनुसार सभी स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर ही फीस स्ट्रक्चर की डिटेल देनी है। इसके बावजूद ज्यादातर स्कूलों की वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर ही नहीं है।
सीबीएसई के नॉर्म के अनुसार सभी स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर ही फीस स्ट्रक्चर की डिटेल देनी है। इसके बावजूद ज्यादातर स्कूलों की वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर ही नहीं है। वहीं, कुछ स्कूलों में पुराने सत्र के फीस स्ट्रक्चर ही दिखाए जा रहे हैं, जबकि नए सत्र की फीस वेबसाइट से गायब है।
निजी स्कूलों द्वारा कक्षा दूसरी में नौ मदों से फीस लेते थे। जिसमें बिल्डिंग मेंटेनेंस, स्पोर्ट्स फीस, कंप्यूटर शुल्क समेत अन्य छह अन्य प्रकार के शुल्क लिए जाते थे। जबकि इस वर्ष सिर्फ ट्यूशन फीस के नाम पर ही 4350 रुपए जमा करने का फरमान स्कूलों को सुनाया गया है।
