ग्रामीण भाजपाईयों को भी अपनी ही पार्टी के घोषणा पत्र का इंतजार
खुज्जी दो है,एक काम का तो दूसरा नाम का – पुरुषोत्तम देवांगन
राजनांदगांव – खुज्जी विधानसभा क्षेत्र में ऐसे तो भारतीय जनता पार्टी का पलडा चौतरफा भारी नजर आ रहा है लेकिन इसके बावजूद भी यहां के स्थानीय भाजपाई कह रहे हैं कि उन्हें घोषणा पत्र का इंतजार है। यदि घोषणा पत्र में किसानों के लिए लोक लुभावन वादे नहीं किए गए तो भाजपा का रास्ता मुश्किलों से भरा हो सकता है। ग्रामीण भाजपाईयों को भी अपनी ही पार्टी के घोषणा पत्र का इंतजार है क्योंकि उन्हे भी यह बात सताने लगी है कि कांग्रेस की मुफ्त की रेवडी से मुकाबला कैसे करेंगे।
यह यहां के स्थानीय ग्रामीण कार्यकर्ताओं के अंदर का भय है जो उन्हे सता रहा है। यह सर्वविदित है कि भारतीय जनता पार्टी ने खुज्जी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव की घोषणा होने के पूर्व ही अपनी 20 सदस्यों की पहली सूचि में राजनांदगांव जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती गीता घासी साहू को अपना प्रत्याशी बनाए जाने की घोषणा कर दी थी।
श्रीमती गीता घासी साहू धीरे-धीरे कछुआ गति से अपने चुनाव प्रचार में काफी दिनों से लगी रही और अब उनका चुनाव प्रचार रथ पूरी गति पकड़ चुका है।
यहां के भारतीय जनता पार्टी समर्थक लोगों ने कहा कि इस बार खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पहले जैसी बात नहीं है। इसके पूर्व 2018 में कांग्रेस का कर्ज माफी एवं धान की अधिक कीमत देने की बात पर लोग एकाएक आ गए थे लेकिन अब यह बात उनके लिए उतनी ही विस्मयकारी नहीं है।
खुज्जी के बस स्टैण्ड की एक पान दुकान में हमसे दो भाजपाईयों ने चुनावी राजनीति पर खुलकर बात की। लगभग 15 वर्षों तक सेवा सहकारी समिति से जुडे रहे भाजपाई खुज्जी ग्राम के तखतराम सोनकर कहते है कि लोगों ने कांग्रेस के 5 साल के कार्यकाल को अच्छे से देखा है नरवा गरुवा,घुरवा,बाड़ी,गौठान आदि की दुर्दशा लोगों के सामने है। वर्मी कंपोस्ट खाद के नाम से किसानों को लूटा जा रहा है जिसके किसान स्वयं प्रत्यक्ष गवाह है क्योंकि पीडित भी वे ही है। किसानों को प्रति एकड़ तीन बोरा वर्मी खाद लेने की बाध्यता तय की गई है और नहीं लेने पर उन्हें यूरिया तथा अन्य खाद नहीं देने की भी बात कही जाती है। कृषकों को वर्मी के नाम पर मिट्टी मिली हुई वर्मी कंपोस्ट खाद जबरिया लेनी पड़ रही है। 30 किलो वजन की एक बोरी वर्मी कंपोस्ट की कीमत ₹300 है।
किसान वर्मी कंपोस्ट खाद लेने के अनिवार्यता को लादेन बताते हुए खुज्जी के समीपस्थ गांव दर्री के भाजपाई बूथ कार्यकर्ता गणेशराम सिन्हा गौठानों के बारे में कहते है कि न तो यहां पैसा है न व्यवस्था है। गौठान कागजों में बन गए हैं। वर्मी कंपोस्ट के बारे में 30 किलो की बजाय 20 किलो 25 किलो ही खाद निकलती है क्योंकि वह गीली होती है और मिट्टी मिश्रित भी होती है।किसानों ऋण माफी भी घोषणानुरुप नहीं हुई है। भूपेश सरकार द्वारा बेरोजगारों को भत्ता देने की बात पर भी यहां पर बहुत आक्रोश देखा गया और इसके अंतर्गत दुनिया भर की सीमाएं बताकर पात्र लोगों को अंगूठा दिखाया गया है।
मजेदार व रुचिपूर्ण बात यह है कि इतना सब होने के बावजूद भी भाजपा के लोग इस बात से इनकार नहीं कर रहे हैं कि यदि किसानों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कोई मास्टर स्ट्रोक नहीं मारा तो भाजपा को मैंदान मारने के लिए एडी चोटी का जोर लगाना पडेगा।
खुज्जी विधानसभा क्षेत्र को लेकर पुरुषोत्तम देवांगन ने बडी रोचक बात बताई। उन्होने बताया कि हम जिस खुज्जी में खडे है उस स्थान का नाम खुज्जी जरुर है लेकिन ये डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र में पडता है। उन्होने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व खुज्जी सहित करेठी,भटगुना,बघमार,दर्री,बरभूम,खुर्सीपार,पटना एवं कुछ गांव परिसीमन के बाद डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र में शामिल कर लिये गए थे तब से खुज्जी नाम का विधानसभा क्षेत्र जरुर है लेकिन खुज्जी गांव जो है वह डोंगरगांव विधानसभा के आंतर्गत आता है और इसलिए स्थानीय लोग बोलचाल में कहते भी है कि खुज्जी दो है,एक नाम का और एक काम का।
