राजनांदगांव । भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष परवेज अहमद पप्पू ने कहा कि शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित प्राइवेट स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा को लेकर पालकों से लूट रहे हैं मोटी रकम, शिक्षा को व्यापार को बना रहे हैं प्राइवेट स्कूल अपने बच्चों को शिक्षा के लिए पालक इस वर्ष असामंजस्य की स्थिति में है । श्री अहमद ने आगे बताया कि हर परिवार को लॉकडाउन के विपरीत समय तो खत्म होने तक प्राइवेट स्कूलों का कर्तव्य है कि उन परिवार जिनके बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं उनकी फीस कम लेकर आर्थिक रूप से मदद करें ना कि परेशानी से जूझ रहे लोगों को फीस पटाने का दबाव डालकर और परेशानी में ना डालें हर मां बाप का सपना होता है कि उनकी बच्चे अच्छे से अच्छा शिक्षा प्राप्त होता कि वह शिक्षित होकर अपने देश का नाम रोशन करें पर इस लॉक डाउन के विपरीत समय में प्राइवेट स्कूल की मनमानी फीस को लेकर मजबूरी में अपने बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने से वंचित कर रहे हैं हमारे देश के हर नागरिक बच्चों को शिक्षित करना हमारे भारत देश के हर नागरिक स्कूलों का कर्तव्य है पर इस्लाम विरोधी नेतृत्व समय में शिक्षा को व्यापार न बनाएं ।
आज लोगों के पास काम का भाव तथा तमाम क्षेत्रों में उत्पाद जीरो हो चुका है टूरिज्म, इंडस्ट्रीज, रेस्टोरेंट, फार्मिंग,जूलरी से लेकर अन्य बिजनेस में कारोबार ठप्प है इस कारण लोग जबरदस्त मानसिक, आर्थिक व भावनात्मक परेशानी से जूझ रहे हैं इस दौरान कई स्कूलों द्वारा ऑनलाइन क्लास दिया जा रहा है कई पेरेंट्स ऐसे हैं जिनके पास स्मार्ट फोन और लैपटॉप नहीं है नेटवर्क की प्रॉब्लम से लोग पहले से परेशान हैं पहले से लोग लोगों के पास ऑनलाइन क्लास का कोई तजुर्बा भी नहीं था ऑनलाइन क्लास के कारण बच्चे लगातार एक्सपोज हो रहे हैं इस कारण उन्हें आंखों और अन्य तरह की परेशानी से रूबरू होना पड़ रहा है कई प्रैक्टिकल क्लास है जो ऑनलाइन नहीं हो सकते हैं ।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फिजिकल क्लास का खर्चा ऑनलाइन से काफी ज्यादा होता है फिजिकल क्लास में बिजली पानी इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्चा और रखरखाव का खर्च काफी ज्यादा है लेकिन ऑनलाइन क्लास में ये खर्चे नहीं है फिर भी पेरेंट्स से याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल ने कहा गया यह मामला जीवन का अधिकार से जुड़ा मामला है इसमें शिक्षा का अधिकार भी शामिल है और उससे बच्चे वंचित हो रहे हैं जिसे प्रोटेक्ट किया जाना जरूरी है कोविद के कारण लोग वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं इस कारण कई पैरंट्स ने अपने बच्चों का नाम तक स्कूल से हटवा दिया है देश में हुए लॉक डाउन के कारण लोग घरों में बंद है और वित्तीय परेशानी में है स्थिति यह है कि देश में लाखों करोड़ों लोग सरकार की सहायता पर निर्भर हो गए हैं ।
ऑनलाइन क्लास में खर्चे नहीं है फिर भी पेरेंट्स से पूरे फीस वसूली की जा रही है और उसके लिए दबाव डाला जा रहा है ऐसे में राज्य सरकारों को निर्देश जारी किया जाना चाहिए कि वह तमाम सहायता और गैर सहायता प्राप्त प्राइवेट स्कूल को निर्देश दे कि वह लॉकडाउन के दौरान और जब तक ऑनलाइन क्लास चल रहा है तब तक स्टूडेंटस से कोई भी फीस ना ले या फिर निर्देश जारी किया जाए की ऑनलाइन क्लास में जो खर्च होता है उसके अनुपात में फीस लिया जाए या फिर सिर्फ ट्यूशन फीस लिया जाए और कोई चार्ज न लिया जाए । इस विषम परिस्थिति में प्राइवेट स्कूलों को सरकार के साथ आगे आकर बच्चों के भविष्य को देखते हुए ऑनलाइन क्लास के चलते बच्चों के पालकों से फीस कम लिया जाए ।
