राष्ट्रीय शिक्षक दिवस एवं देश-धरती के महान शिक्षाविद् दार्शनिक पूर्व राष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णनन् जी के परम पुनीत मंगल स्मरण के अतिशय महत्तम सुअवसर पर नगर के विचारप्रज्ञ प्राध्यापक कृष्ण कुमार द्विवेददी ने समसामयिक आहाव्हन चिंतन टीप में बताया कि सदा सर्वदा-काल से वृहद ज्ञान, सुशिक्षा, सदाचार के शिक्षण-प्रशिक्षण के पुमुख आधार स्तंभ शिक्षकों को संस्कृति संरक्षण तथा राष्ट्र निर्माण के गुरूत्तर दायित्व का निर्वहन की अतीव गौरवशील परम्परा को सतत् रखते होगी । हमारी अद्वितीय संस्कृति के आधार सर्वोत्कृष्ठ शिक्षक-छात्र परम्परा ने ही विश्वगुरू की आसंदी पर बैठाया और सर्वश्रेष्ठ शिक्षापद्धति और उत्कृष्ट शिक्षक-छात्र संबंधों ने देश की विशिष्ट सांस्कृति पहचान दी । वस्तुतः शिक्षा-शिक्षण का मूल उद्देश्य शिक्षक द्वारा अपने छात्र-शिष्य-शिक्षार्थी का समग्र ज्ञान एवं सदाचार शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ ऐसे राष्ट्रधर्मी नागरिकों के रूप में तैयार करना होता है जो सम-विषम परिस्थितियों में संस्कृति-राष्ट्ररक्षा हेतु हमेश तत्पर रहें साथ ही देश के विकास, संस्कृति-संवर्धन की मुख्य धारा में सक्रियता से सम्म्लिित भी रहें । आगे प्राध्यापक द्विवेदी ने विशेष जोर देते हुए आव्हान किया कि वर्तमान शिक्षक-शिक्षार्थी पीढ़ी को देश के आदर्श शिक्षक-शिक्षाविद् के जीवंत उदाहरण डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णनन, डॉ.ए.पी.जे.कलाम के शिक्षादर्शन तथा उत्कर्ष जीवनक्रम को आत्मसात कर सतंकल्पित होकर राष्ट्र निर्माण के महानदायित्व का निर्वहन करना होगा । यही शिक्षक दिवस का सत्यसार्थक संकल्प होगा ।
