राजनांदगांव. वनांचल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मानपुर से प्रतिबंध के बाद भी रेत का अवैध उत्खनन कर महाराष्ट्र प्रांत के अंतर्गत आने वाले गढ़चिरौली सहित आसपास के क्षेत्रों में भेजने की शिकायतें मिल रही है. स्थानीय स्तर पर इसका विरोध भी किया जा रहा है लेकिन खनिज विभाग के अधिकारी आंख मूंदे हुए है.
आलम यह है कि क्षेत्र से बड़े पैमाने पर रेत का अवैध कर भेजा जा रहा है. मिली जानकारी के मुताबिक वनांचल के अनुसूचित क्षेत्र से व महाराष्ट्र-छत्तीसगढ राज्य सीमा क्षेत्र के मानपुर ब्लाक अन्तर्गत क्षेत्र के कई गांव तोलूम, पानाबरस, नवाटोला, कोतरी, भर्रीटोला, कोहका, कहगांव आदि नदियों के रेत खदान से लगातार रेत का परिवहन जारी है. एक ओर पूरा देश कोरोना महामारी से व अघोषित लगातार लॉकडाउन के चलते क्षेत्र की राज्य सीमा सील है फिर भी नियमों को ताक में रखकर छत्तीसगढ की रेत को महाराष्ट्र प्रांत के अंतर्गत आने गढ़चिरौली सहित आसपास के क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है.
विरोध करने के बाद भी नहीं दे रहे ध्यान
ज्ञात हो की क्षेत्र में हो रहे रेत परिवहन को बंद कराने ग्रामीण कई बार विरोध करने के साथ मानपुर के स्थानीय बस स्टैंड में भी कुछ दिन पहले ग्रामीणों द्वारा अवैध रेत परिवहन में लगे तीन हाईवा ट्रक को पकड कर मानपुर पुलिस के हवाले किया गया था. इनसे कागजात की जांच पड़ताल करने पर पर्ची महाराष्ट्र के गड़चिरौली की पायी गई, जिसके आधार पर मामला पंजीबद्ध किया गया. महाराष्ट्र में सोने की भाव बिक रही रेत छत्तीसगढ़ की रेत की कीमत महाराष्ट्र के गड़चिरौली अत्यधिक मिल रही है. यही कारण है कि क्षेत्र से बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन कर महाराष्ट्र प्रांत के गढ़चिरौली सहित आसपास के क्षेत्रों में बेची जा रही है. क्षेत्र के रेत खदान से भारी मात्रा मे रात-दिन बड़ी-बड़ी हाईवा ट्रकों से लगातार रेत परिवहन होने से नदी, नालों के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुचाया जा रहा है.
