– राज्य स्तर से जारी डेल्टा रैंकिग में गोधन न्याय योजना के तहत राजनांदगांव जिले ने किया द्वितीय स्थान प्राप्त
– विभिन्न मानकों पर किया उत्कृष्ट प्रदर्शन
– जिला अंतर्गत महाभियान चलाकर संचालित सभी गौठानों में गोबर खरीदी एवं वर्मी खाद का किया गया शत-प्रतिशत उठाव
– जिले के 98 प्रतिशत गौठानों में विगत पखवाड़े में की गई 30 क्विंटल से अधिक गोबर खरीदी
– खाद विक्रय 85 प्रतिशत रहा
– गौमूत्र से निर्मित उत्पादों की शत-प्रतिशत हुई बिक्री
राजनांदगांव 12 जुलाई 2023। शासन की गोधन न्याय योजना गरीब एवं जरूरतमंदों के जीवन में परिवर्तन ला रही है। जिले में गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन के लिए बेहतरीन कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में इस माह राज्य स्तर से जारी डेल्टा रैंकिग में गोधन न्याय योजना के तहत राजनांदगांव जिले ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। उल्लेखनीय है कि योजनांतर्गत गोधन न्याय योजनांतर्गत राज्य स्तर पर प्रतिमाह सक्रिय गौठान, सक्रिय विक्रेता, प्रति 15 दिवस में 30 क्ंिवटल से अधिक गोबर खरीदी करने वाले गौठान, वर्मी खाद रूपान्तरण, गौठानों में आजीविका गतिविधि, कुल खाद उत्पादन की तुलना में विक्रय एवं गौमूत्र उत्पाद के विक्रय मानकों के आधार पर डेल्टा रैंकिंग जारी की जाती है। इन मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले ने यह उपलब्धि हासिल की है। कलेक्टर श्री डोमन सिंह के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत सीईओ श्री अमित कुमार के निर्देशन में टीम द्वारा बेहतरीन कार्य किया जा रहा है। जिला अंतर्गत महाभियान चलाकर संचालित सभी गौठानों में गोबर खरीदी एवं वर्मी खाद उठाव का कार्य शत-प्रतिशत गौठानों में किया गया है।
गौरतलब है कि राजनांदगांव जिले के 98 प्रतिशत गौठानों में विगत पखवाड़े में 30 क्विंटल से अधिक गोबर खरीदी की गई एवं खाद विक्रय 85 प्रतिशत रहा। साथ ही गौमूत्र से निर्मित उत्पादों की शत-प्रतिशत बिक्री की गई। जिले में गोधन न्याय योजनांतर्गत 424 गौठान संचालित हैं। जिसमें 424 गौठान ग्रामीण क्षेत्र में एवं 10 गौठान शहरी क्षेत्र में संचालित हो रहे हैं। जिले में गौठान मेला के माध्यम से गोबर खरीदी, जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया गया है। कृषि विशेषज्ञों के माध्यम से जनसामान्य को जैविक खेती के फायदे के संबंध में जानकारी दी गई है। वर्मी कम्पोस्ट निर्माण एवं गौमूत्र से उत्पाद तैयार करने के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही सामुदायिक बाड़ी के लिए वैज्ञानिक तरीकों के बारे में लाभप्रद सुझाव दिया गया। कृषि सखी एवं कृषि सीआरपी द्वारा जैविक खाद, जैविक कीटनाशक, मृदा एवं बीज प्रबंधन की जानकारी दी गई। सामुदायिक बाड़ी, मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया तथा मछली पालन के लिए जानकारी देने के साथ ही प्रदर्शनी लगाई। बिहान मेला में जिले भर की 90 स्वसहायता समूह की 207 महिलाएं शामिल हुई। जहां उनके 7 लाख 38 हजार 300 रूपए की राशि के वस्तुओं की बिक्री हुई। बिहान मेला में 8 लाख 8 हजार उत्पादों की बिक्री हुई है तथा 4 करोड़ 5 लाख रूपए की राशि का बैंक लिंकेज करते हुए उन्हें ऋण प्रदान किया गया तथा आजीविका मूलक गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया।
क्रमांक 42-उषा किरण ———————-
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत समस्या एवं समाधान
राजनांदगांव 12 जुलाई 2023। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधानानुसार कृषकों को फसल उत्पादन में क्षति के अतिरिक्त बुआई नहीं हो पाने, रोपण बाधित होने, मौसम प्रतिकूलताओं के कारण नुकसान, स्थानीय आपदाओं की स्थिति होने पर कृषकों को संबल प्रदान करने के उद्देश्य से फसल बीमा योजना लागू की गयी है। इस योजना के तहत शासन द्वारा कृषकों की फसल खराब होने पर उन्हें बीमा कवर प्रदान किया जाता है, यानि फसल खराब होने पर बीमा दावा राशि कृषकों को प्रदाय की जाती हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से हुये फसल नुकसान पर पीडि़त कृषकों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि कृषकों को नवीन और आधुनिक कृषि पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके और कृषकों की आय को स्थिर एवं उनकी खेती में निरंतरता सुनिश्चित हो सके। इस योजना के तहत शासन द्वारा कृषकों को फसलों के नुकसान पर अलग-अलग धन राशि प्रदान की जाती है। अंतिम भुगतान हेतु दावा गणना आयुक्त भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अधिसूचित क्षेत्र एवं अधिसूचित फसलों के लिए निर्धारित न्यूनतम अनिवार्य संख्या में किये गये फसल कटाई प्रयोग से प्राप्त औसत उपज के आकड़ों के आधार पर की जाती है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत जिले के ग्रामों में कृषकों को फसल बीमा कराने एवं दावा राशि के भुगतान के संबंध में समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जहां एक ही नाम के दो-दो गांव है। इस संबंध में जिला कृषि कार्यालय एवं बैंकों द्वारा कुछ बीमा इकाई ग्राम की सूची दी गई है, जिसमें कृषकों की जानकारी भूईयां पोर्टल एवं एनसीआईसी पोर्टल में राजस्व निरीक्षक केन्द्र परिवर्तन होने से पोर्टल में तकनीकी व हेरार की समस्या के कारण से दर्ज नहीं हो सकी है। साथ ही जिले में ऐसे ग्राम भी है, जिनके लैण्ड रिकार्ड की जानकारी को राजस्व निरीक्षण मंडल नाम से विभाजित किया गया है। जिससे डिजिटल भू-अभिलेख डाटा बेस में एक ग्राम कई बार अलग-अलग ग्राम के रूप में प्रदर्शित हो रहे है, जबकि राष्ट्रीय बीमा पोर्टल में एक ही बार प्रदर्शित हो रहे हंै। इस कारण से ग्रामों के कृषकों को बीमा दावा भुगतान करने में कठिनाई उत्पन्न हो रही है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मौसम खरीफ एवं रबी 2022-23 अंतर्गत जिला कृषि कार्यालय एवं विभिन्न बैंकों द्वारा उपलब्ध कराये गये ग्रामों की सूची अनुसार राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल का राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग के भुंईया पोर्टल से लैंड रिकार्ड इंटिग्रेशन होने के कारण तकनीकी समस्या उत्पन्न होने से राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल में कृषकों की प्रविष्टि में बाधा आ रही हैं। क्षेत्रीय प्रबंधक एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इण्डिया लिमिटेड रायपुर द्वारा जानकारी दी गई है कि शासन के निर्देशानुसार कथित तौर पर यह निर्देश दिया गया है कि फसल बीमा पोर्टल के वालेट में जमा प्रीमियम राशि संबंधित बैंकों को न लौटाया जाए, ताकि पोर्टल पुन: खुलने पर छूटे हुए किसानों की जानकारी इंद्राज की जा सके। इस परिपेक्ष्य में राज्य स्तर पर कृषि विभाग भू-अभिलेख एवं राष्ट्रीय सूचना एवं विज्ञान केन्द्र स्तर पर एनसीआईपी पोर्टल में प्रविष्टि हेतु लंबित ग्रामों के कृषकों को बीमा आवरण में शामिल कर प्रकरणों का समाधान करने की कार्रवाई निरंतर की जा रही है।
