राजनांदगांव. शासकीय कमला देवी राठी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजनांदगांव के भूगोल विभाग द्वारा विश्व जैव-विविधता संरक्षण दिवस के अतीव महत्वा परिपे्रक्ष्य में संस्था प्राचार्य डॉ. आलोक मिश्रा के प्रमुख संरक्षण में विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्ण कुमार द्विवेदी ने विषयगत छात्राओं को बताया कि ब्रम्हाण्ड के एक मात्र जीवंत ग्रह पृथ्वी में जैव विविधता प्रकृति का अनमोल उपहार है। जो पर्यावरण तथा मानव दोनों के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण और समृद्धकारी है। वास्तविकता में जैव विविधता ही सर्व के लिए खाद्य पदार्थो तथा औषधियों की आपूर्ति के साथ-साथ आर्थिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से संपन्न रखने और संपूर्ण पारिस्थितकतंत्रों को सुदृढ़ रखती है। जैव विविधता मिट्टी निर्माण, अपशिष्ट निस्तारण, वायु एवं जल शुद्धिकरण, पोषक चक्रीकरण, सौर ऊर्जा अवशोषण एवं जैव भू रासायनिक तथा जलीय चक्रों के सहज प्रबंधन में भी मुख्य भूमिका निभाती है। सार्थक अर्थो में जैव विविधता की पृथ्वी पर सतत् जीवन का आधार है। इसी बहुमूल्य जैव विविधता के कारण ही अखिल विश्व में अस्सी हजार से अधिक पादप प्रजातियां है जो मानवीय आहार की आधार है तथा पांच सौ से अधिक पादप प्रजातियाँ है जो औषधियों और बहुमूल्य जड़ी-बूटियां प्रदान करती है। विशेष रूप से उष्ण कटिबंधीय वर्षा और भू-मध्य रेखीय प्रदेश की पादप एवं जैव प्रजातियां समग्र पर्यावरण को समृद्ध बनाती हैं और पृथ्वी के पर्यावरण को संतुलित करती है। आगे प्राध्यापक द्विवेदी ने व्याख्यान में स्पष्ट किया कि बढ़ते प्रदूषण, गहराते भू-मंडलीय तापन, जलवायु परिवर्तन, अम्लीय वर्षा आदि के संकट में पच्चीस हजार से अधिक जैव-पादप प्रजातियों को विलोप्ता के कगार पर ला दिया है। पृथ्वी के पर्यावरण को सुरक्षित एवं मानव के अस्तित्व हेतु जैव विविधता को संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है। किसी भी जैव प्रजाति के नष्ट होने से संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र विक्षुब्ध हो जाता है और पर्यावरण संतुलन बिगडऩे लगता है और गहन संकट और अधिक गहराने लगते हैं। सामयिक रूप से जैव विविधता संरक्षण हेतु प्राध्यापक द्विवेदी ने विश्ेाष आह्वान करते हुए कहा कि जैव विविधता की रक्षा सभी का मूल दायित्व है और सनातन काल से ही हमारी भारतीय संस्कृति और गौरवशाली जीवन-दर्शन ने सभी को प्रेरित किया है कि जीवों पर दया करो और जियो और जीने दो। और यही जैव विविधता संरक्षण दिवस का श्रेष्ठ और सार्थक संदेश है। आईये हम सभी इसका मन-प्राण से अनुपालन करें।
