प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) की सड़कों की गुणवत्ता में कमी से चिंतित सरकार कड़ा फैसला लेने जा रही है। खराब काम करने पर काली सूची में डाले गए ठेकेदारों को योजना में दोबारा काम न देने का प्रस्ताव है। लोक निर्माण विभाग व ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को इस संबंध में कार्यवाही का निर्देश दे दिया गया है।
उच्च स्तर पर फीडबैक है कि योजना के शुरुआती वर्षों में पीएमजीएसवाई के अंतर्गत बनाई गई सड़कों की गुणवत्ता बहुत अच्छी थी। इससे आम लोगों के बीच योजना के साथ-साथ सरकार की छवि भी अच्छी बनी। मगर, हाल के वर्षों में काली सूची में डालकर काम से प्रतिबंधित किए गए ठेकेदारों को फिर से काम देना शुरू कर दिया गया।
इस वजह से न सिर्फ मार्ग की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि आम लोगों की नजर में योजना व सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के सभापति व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के निदेशालयों को ऐसा सिस्टम विकसित करने का निर्देश दिया है।
जिससे काली सूची में डाल कर तय समय सीमा के लिए काम से प्रतिबंधित किए गए ठेकेदार दोबारा योजना में काम न कर सकें। प्रस्तावित सिस्टम में योजना में खराब काम करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की व्यवस्था बनाने को कहा गया है।
दंड में स्थानांतरण मान्य नहीं
सरकार के संज्ञान में यह भी आया है कि पीएमजीएसवाई के कार्यों में लापरवाही बरतने या अनियमितता किए जाने संबंधी मामले सामने आने पर इंजीनियरों का स्थानांतरण कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है। हरदोई, प्रतापगढ़, सोनभद्र व चंदौली के इस तरह के मामले संज्ञान में लिए गए हैं। लोक निर्माण विभाग व ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को स्पष्ट कर दिया गया है कि ऐसे मामलों में स्थानांतरण दंडात्मक श्रेणी में नहीं आते हैं। यह सिर्फ औपचारिकता मात्र है। अब तय समय सीमा में दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी।
