पंचवटी के सी-ब्लॉक में रहने वाले ऋषभ जैन की उत्तराखंड में देहरादून के पास हुए हादसे में मौत के बाद परिवार बिखर गया। माता-पिता की पूर्व में मौत हो जाने के बाद ऋषभ (27) अपनी 72 वर्षीय दादी और छोटी बहन का एकमात्र सहारा थे। प्राइवेट नौकरी करके वह घर चलाते थे। वह अपने बूढ़े दादी-दादी का भी एकमात्र सहारा थे जो अब पोते के जाने से पूरी तरह टूट चुके हैं।
पहले बेटे-बहू ने साथ छोड़ा अब पोता भी चला गया
ऋषभ की दादी का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि पहले बेटा छोड़कर चला गया, फिर बहू और अब पोते को भी भगवान ने उनसे छीन लिया। उनकी जिंदगी में उन्होंने एक के बाद एक इतने दुख देख लिए कि अब जीना मुश्किल हो गया है।
वीकेंड की लंबी छुट्टियां मौत के मुंह में ले गई ऋषभ और सूरज को
सप्ताह के अंत में लगातार तीन सरकारी छुट्टियां सूरज कश्यप और ऋषभ को मौत के मुंह में ले गई। दुहाई के रहने वाले सूरज कश्यप (27) एचडीएफसी की आर्य नगर शाखा में नौकरी करते थे।
भाई बिरजू ने बताया गुड फ्राइडे, सप्ताह का द्वितीय शनिवार और फिर रविवार लगातार तीन दिन की छुट्टी होने की वजह से सूरज का घूमने जाने का प्रोग्राम बना था। शुक्रवार दाेपहर करीब 2:30 बजे घूमने जाने की बात कहकर वह घर से गया था।
शनिवार सुबह लगभग 11:30 बजे देहरादून के विकास नगर थाने से हादसे में मौत होने की सूचना मिली। पुलिस ने उन्हें बताया कि शुक्रवार रात 11 से 12 के बीच में कार पहाड़ से नीचे गिर गई थी। बिरजू ने बताया कि सूरज की इसी साल शादी होने वाली थी। अंदाजा नहीं था कि घूमने जाएगा तो वह कभी घर नहीं लौटेगा।
पोंटा साहिब जाने के लिए कहकर गए थे ज्ञानेंद्र सैनी
गाजियाबाद के मालीवाड़ा में रहने वाले ज्ञानेंद्र सैनी (42) भी इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दोस्तों के साथ वह अपनी स्विफ्ट डिजायर कार लेकर उनके साथ घूमने गए थे।
ज्ञानेंद्र के छोटे भाई कपिल ने बताया कि टैक्स एडवोकेट हैं और गाजियाबाद के सुचित्रा कांप्लेक्स में उनका कार्यालय है। शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे वह घर पर पोंटा साहिब जाने के लिए कहकर निकले थे।
उनका कहना है कि लगातार कई दिन का अवकाश होने की वजह से उन्होंने दोस्तों के साथ घूमने जाने का कार्यक्रम तय किया था। उनका कहना है कि शनिवार दोपहर करीब 12 बजे सड़क हादसे में उनके घायल होने की सूचना मिली। जानकारी मिलते ही उनके भाई और परिवार के दो अन्य सदस्य उत्तराखंड के लिए रवाना हो गए।
