ग्वालियर
चिकित्सा के क्षेत्र में ग्वालियर उड़ान भर रहा है। इसी क्रम में अगले तीन साल में शहर में तीन निजी मेडिकल कालेज और खुलने जा रहे हैं, जहां आठ साल बाद हर वर्ष 700 डाक्टर तैयार होंगे। पहले मेडिकल कालेज की नींव 22 मई को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुरैरी क्षेत्र में रखेंगे, जिसका नाम देवराज इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल कालेज होगा।
जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू) और आइटीएम विश्वविद्यालय भी शहर में मेडिकल कालेज खोलने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। आइटीएम द्वारा सिथौली पर 300 बेड के अस्पताल का संचालन शुरू कर दिया गया है, अब कालेज खोलने के लिए प्रबंधन आवेदन करेगा। जेयू ने मेडिकल कालेज के लिए जिला अस्पताल से अनुबंध कर लिया है। गौरतलब है प्रदेश में पहला शासकीय मेडिकल कालेज शहर में गजरा राजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) के रूप में 1946 में शुरू हुआ था। प्रारंभ में यह 25 एमबीबीएस सीट का खोला गया था, जो अब 200 सीट का हो चुका है। वर्ष 2023 तक इसमें 250 सीट होने की संभावना है।
जानें कहां-कितनी सीट के खुलेंगे कालेज
मेडिकल कालेज अस्पताल में बेड एमबीबीएस सीट
देवराज इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस 300 150
आइटीएम का मेडिकल कालेज 300 150
जेयू का मेडिकल कालेज जिला अस्पताल से अनुबंध 150
संभावना: जिले में एमबीबीएस की होंगी 850 सीटें
जीआरएमसी में 2023 तक एमबीबीएस की 250 सीट उपलब्ध होने का अनुसार है। वहीं खुरैरी में देवराज मेडिकल कालेज द्वारा एमबीबीएस की 150 सीट के लिए एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) में आवेदन किया जाएगा तथा नर्सिंग स्कूल का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इसी तरह आइटीएम 150 एमबीबीएस सीट का कालेज खोलने आवेदन करेगा। जेयू ने भी 150 सीट का मेडिकल कालेज खोलने शासन से तुरारी क्षेत्र में जगह की मांग की है।
नए अस्पतालों में मिलेगा आधुनिक इलाज
देवराज इंस्ट्यूट आफ मेडिकल साइंस संस्थान के सचिव डा. सलोनी सिंह ने शुक्रवार को मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि पहले फेज में 300 बेड का अस्पताल व ओपीडी के साथ नर्सिंग स्कूल की शुरुआत की जाएगी। एक साल बाद अस्पताल का विस्तार करते हुए उसे 650 बेड का बनाया जाएगा। वहीं डा. सिंह का कहना था कि इस संस्थान की संरचना अंतरराष्ट्रीय कंपनी हास्मैक इंडिया लिमटेड द्वारा की गई है। इसका संचालन डा. विवेक देसाई के नेतृत्व में होगा। अस्पताल में ट्रामा सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर, पीईटी स्कैन और लिनियर एस्कीलेटर जैसी सुविधाएं भी होगी। कैंसर के मरीजों के लिए उच्च स्तरीय सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जाएंगी।
