खंडवा
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। तत्कालीन सरपंच-सचिवों ने योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की है। ऐसा ही एक मामला गुरुवार को समीक्षा करने पहुंचे केन्द्रीय राज मंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास के पास पहुंचा है। जांच प्रतिवेदन में छैगांव माखन के अधिकारियों ने कहा है कि पंचायत के तत्कालीन सरपंच-सचिव बगैर निर्माण कराए 18.53 लाख रुपए पंचायत खाते से आहरित कर लिया है।
जिले के छैगांव माखन जनपद पंचायत एरिया के भीलखेड़ी पंचायत में 14वां व 15वां वित्त योजना में सड$क का निर्माण कराया गया है। जनपद सीइओ की ओर से मुख्य कार्य पालन अधिकारी जिला पंचायत को भेजे गए जांच जांच प्रतिवेदन के तहत पंचायत के भीलखेड़ी में मौके पर सड$क ही नहीं है। जांच प्रतिवेदन के अनुसार 15वं वित्त योजना के तहत नागू के घर से आंनदसम के घर तरफ वडियासकना में 1.67 लाख रुपए की लागत की सड$क कागज पर निर्माण कराकर पंचायत खाते से राशि आहरित कर ली। जांच अधिकारी ने राशि वसूली योग्य बताई है। इसी तरह 14वां वित्त योजना के तहत राधेश्याम सुंडया के घर से दशरथ के घर की तरफ बडियासकना में 2.52 लाख रुपए की लागत से सीसी सड$क निर्माण किए जाने के नाम पर पंचायत खाते से राशि आहरित की गई है। लेकिन मौके पर सड$क नहीं होने पर अधिकारियों ने जांच प्रतिवेदन में राशि वसूली योग्य बताया है। जांच प्रतिवेदन में जांच अधिकारियों ने पंचायत के तत्कालीन सरपंच दुर्गाबाई, ग्राम रोजगार सेवक एवं पंचायत प्रभारी सचिव सोनू ङ्क्षसह मंडलोई से आहरित की गई राशि को वसूल करने के साथ ही प्रकरण पंद्धीबद्ध करने की अनुशंसा की है।
कूप निर्माण में फर्जीवाड़ा
जांच प्रतिवेदन के तहत 24 सितंबर 2021 को भीलखेड़ी में निजी कुंआ को सरकारी कुंआ बताकर 5.41 लाख रुपए की स्वीकृत राशि में से पेयजल कूप के नाम पर 3.90 लाख रुपए पंचायत खात से आहरित कर लिया गया है। जांच प्रतिवेदन में राशि वसूली योग्य बताई गई है। जांच के दौरान भू-स्वामी राकेश पुत्र पहाड़ ङ्क्षसह ने बताया कि उक्त कुंआ 50 साल पुराना है। मेरे पुरखों ने निर्माण कराया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार इसी तरह कई अन्य योजनाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है।
मस्टर रोल में पत्नी का नाम दर्ज कर 30 हजार डकारे
भलखेड़ी ग्राम पंचातय का ग्राम रोजगार सहायक पत्नी के नाम मनरेगा में हजारो रुपए का भुगतान कर लिया है। मस्टर रोल पर नाम दर्ज करने के बाद ग्राम रोजगार सहायक ने 30 हजार रुपए वसूली योग्य बताया है।
