गरियाबंद 14 मई 2022
छत्तीसगढ़ मध्य भारत में स्थित एक भारी वनाच्छादित राज्य है। इस राज्य में कुल बयालीस (42) अनुसूचित जनजातियां हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, छत्तीसगढ़ में भारत की जनजातीय आबादी का लगभग 7.5 प्रतिशत का आवास है और राज्य की आबादी के लगभग 30 प्रतिशत लोग आदिवासी हैं। सिफ़री ने, छत्तीसगढ़ मत्स्य विभाग के साथ साजेदारी में, आदिवासी आबादी की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के उत्थान के लिए पहल की है। जलाशय और बांध इस राज्य के प्रमुख अन्तर्स्थलीय खुले जल संसाधन हैं। सिफ़री के निदेशक डॉ. बि.के. दास के नेतृत्व में चयनित छोटे जलाशयों में प्राथमिक मछुआरा सहकारी समितियों (पीएफसीएस) की मदद से मछली उत्पादन वृद्धि कार्यक्रम शुरू किया गया है। संस्थान ने छत्तीसगढ़ के दस चयनित छोटे जलाशयों में (तोरेंगा, बहेरा खार, सुतिया पथ, मतियामोती बांध, कोसेर्टेडा, राबो, घुंघुट्टा, गेज, केशवनाला) बीस पेन, दस इंजन वाले नाव, बीस कोरकल और बीस टन सिफ़री केज ग्रो फीड प्रदान किया है।
सिफ़री ने लागत कम और जलाशय के उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से 13 मई, 2022 को टौरेंगा जलाशय में छत्तीसगढ़ मत्स्य निदेशालय के सहयोग से एक पेनकल्चर प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया। सिफ़री के निदेशक डॉ. बि.के दास और छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन विभाग के निदेशक श्री एन.एस. नाग ने जलाशय में स्थापित पेन में मछली के बीज छोड़े। प्रदर्शन के बाद एक संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। डॉ. दास ने सभा को संबोधित किया और उन्हें जलाशयों में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए पेनकल्चर के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने आजीविका और पोषण सुरक्षा के लिए मछली के महत्व पर भी प्रकाश डाला। छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन विभाग के निदेशक एन.एस. नाग ने आदिवासी मछुआरों को संबोधित करते हुए कहा कि पेनकल्चर के माध्यम से जलाशय में मछली के बीज को बढ़ाया जा सकता हैं, जो न केवल जलाशय के उत्पादन में सुधार करेगा बल्कि उत्पादन की लागत को भी कम करेगा और साथ ही मछुआरों की आजीविका में सुधार होगा। इस कार्यक्रम में कुल 56 आदिवासी लाभार्थी व हितग्राही उपस्थित थे। सिफ़री ने केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा की सहायता से एक परियोजना के तहत पोषित फ़ीड विकसित किया है। सिफ़री के निदेशक डॉ. बि.के दास एवं डॉ जीतेन्द्र सिंह, वैज्ञानिक केंद्रीय तसर अनुसन्धान व प्रशिक्षण संस्थान, रांची द्वारा परीक्षण के लिए छत्तीसगढ़ के आदिवासी मछुआरों को कुल 5 किलोग्राम के 10 बैग फ़ीड सौंपा गया। फ़ीड का पेलेट आकार 2,3 और 4 मिमी था जिसमें क्रमशः 32 क्रूड प्रोटीन और 6 लिपिड, 28 क्रूड प्रोटीन और 5ः लिपिड और 25 क्रूड प्रोटीन और 5 लिपिड थे। ये तैरते हुए फ़ीड अत्यधिक सुपाच्य और पानी में स्थिर रहने वाले हैं, जिससे मछलियों की अच्छी वृद्धि होती हैं और मछलियाँ स्वास्थ्य और बहुत सक्रिय और ऊर्जावान रहती हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ.अपर्णा रॉय, वरिष्ठ वैज्ञानिक; सतीश कौशलेश, वैज्ञानिक; कौशिक मंडल, तकनीकी सहायक, ने श्री डी के सिंह, डीडीएफ और ए. बसिष्ठ, डीडीएफ; मधु खाखा, एडीएफ, सौरव चंद्राकर, एफआई, मत्स्य विभाग, छत्तीसगढ़ एवं माँ जतमई मत्स्य सहकारी समिति मर्यादित के सक्रिय समर्थन से सम्पन्न किया।
