रायपुर- मध्यप्रदेश में कर्मचारियों को 31 फीसद महंगाई भत्ता देने के बाद अब मध्यप्रदेश शासन से प्रमुख सचिव वित्त विभाग मनोज गोविल ने छत्तीसगढ़ राज्य शासन को पत्र लिखा है कि मध्यप्रदेश में शासन पेंशनर्स को भी इतना ही महंगाई राहत (डीआर) देना चाहता है,अतः इसके लिए नियमों के परिपालन में सहमति मांगा गया है।पेंशनर संघो ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से सहमति देने की मांग की है।
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री व छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन प्रमुख सचिव वित्त विभाग से मनोज गोविल की छत्तीसगढ़ राज्य शासन को लिखे गए चिट्ठी के बाद अब फैसला छत्तीसगढ़ के हाथों में है, इसके बाद ही दोनों राज्यों में पेंशनर्स को महंगाई राहत देना सम्भव होगा।
अभी मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को 31 फीशद डीए और पेंशनरों को केवल 17 फीसद डीआर मिल रहा है।छत्तीसगढ़ राज्य में कर्मचारियों और पेंशनरों दोनों को 17 फीसद डीए,डीआर मिल रहा है।मध्यप्रदेश में केबिनेट ने कर्मचारियों के साथ साथ पेंशनरों को भी 31 फीसद डीआर देने का निर्णय लिया गया है, परंतु मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) की संवैधानिक बाध्यता के कारण दोनों राज्य के आपसी सहमति होना जरूरी है इसके बिना पेंशनरों को महंगाई राहत की किस्तों का भुगतान हेतु आदेश पारित नहीं किया जा सकता है,इसलिए मध्यप्रदेश शासन ने 23 मार्च 22 को विधिवत पत्र भेजकर सहमति चाहा है।फेडरेशन से जुड़े संगठन छत्तीसगढ़ पेंशनर कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष डा.डीपी मनहर ,भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष जेपी मिश्रा, पेंशनर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष गंगाप्रसाद साहू, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील पेंशनर्स कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष आरपी शर्मा,पेंशनर समाज के अध्यक्ष ओपी भट्ट, वरिष्ठ नागरिक परिसंघ के प्रांतीय संयोजक अनूप श्रीवास्तव ने इसे संज्ञान में लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मध्यप्रदेश सरकार के पत्र पर तत्काल निर्णय लेकर दोनों राज्यों के पेंशनरों को महंगाई राहत आदेश जारी करने हेतु सहमति देने की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है।
