छईखदान के बाद गंडई नगर पंचायत में भी भाजपा उलटफेर का शिकार हो गई। पार्षदों द्वारा लाए गए अविश्ववास प्रस्ताव पर सोमवार को बहुमत की मुहर लग गई। मुहर लगते ही भाजपा के नपं अध्यक्ष को कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। इस तरह एक माह के भीतर अपने ही पार्षदों की खिलाफत की वजह से भाजपा को दो नगर पंचायत से सत्ता गंवानी पड़ी। उल्लेखनीय है कि दोनों नगर पंचायत खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है जहां 12 अप्रैल को उपचुनाव होना है। इस उलटफेर को कांग्रेस की चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सोमवार को नगर पंचायत में चुनाव था। इसको लेकर गहमागहमी की स्थिति रही। दोनों दल के नेता व कार्यकर्ता सुबह से नगर पंचायत के बाहर डटे रहे और पार्टी के पक्ष में नारेबाजी करते रहे। अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ 11 तो, पक्ष में चार वोट पड़े हैं। लंबी खींचतान के बाद श्यामपाल ताम्रकार की नेतृत्व वाली नगरीय सरकार गिर गई।
खास बात यह रही कि नगरीय सरकार गिराने में चार भाजपा पार्षद भी शामिल रहे। क्योंकि कांग्रेस के पास महज सात ही पार्षद है। ऐसे में लाजमी है कि भाजपा पार्षदों ने बगावत करते हुए अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन दिया है।
