राजनांदगांव। समाजसेवी संस्था आराधना मंच द्वारा कस्तुरबा भवन में अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस व रंगो का पर्व होली के परिप्रेक्ष्य में रंगगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महिलाओं के बीच हर्षोल्लास के साथ होली मिलन मनाया गया। वही नारी शक्ति जागरण के तहत नगर की समाजसेवी महिलाओं सहित नासा से सम्मानित युवा वैज्ञानिकों का सम्मान कर नगर में एक नया आयाम स्थापित किया गया।गत दिनों भिलाई में सांसद सरोज पांडेय की उपस्थिति में महिला दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके द्वारा नगर की समाजसेवी महिला व अधिवक्ता शारदा तिवारी का सम्मान किया गया। इससे गर्व की अनुभूति करते हुए आराधना मंच ने शारदा का भावभीना सम्मान कर उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया।
गीत प्रस्तुत किया गया
इस अवसर पर सुमधुर गायिका वंदना सिन्हा ने एक से बढ़कर-एक गीत प्रस्तुत कर होली पर्व का रंग बिखेरा। वही मंच की अध्यक्ष सरस्वती माहेश्वरी, शारदा तिवारी, कुसुम रायचा, प्रभा बरडिया, उमा रूगंटा, शशि प्रभा खंडेलवाल की उपस्थिति में कुसुम रायचा, किरण अग्रवाल, सरला गोलछा, उमा खंडेलवाल, मोना लोहिया, छाया खंडेलवाल द्वारा फूलों की होली खेलते हुए फागुन के रंग में भीगे होली के गीत प्रस्तुत किये जिसका तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ स्वागत किया गया।
समाज सेवा के लिए प्रेरित किया
संस्था की अलका जानी ने शारदा दीदी की बातों को सिरोधार्य करते हुए बताया कि एक वह भी जमाना था जब राजनांदगांव की महिलाएं मर्यादावश घर से बाहर कदम नहीं रखती थी। ऐसे माहौल में शारदा ने सामाजिक सेवा के कार्यों के लिए नगर की महिलाओं में प्राण फूंके और उन्हें जागरूक बनाते हुए समाज सेवा कार्यो के लिए उत्प्रेरित किया। यही वजह है कि आज समाज सेवा के क्षेत्र में महिलाए बढ़-चढ़कर आ रही है और नाम कमा रही है।
सबसे सफल महिला होती है गृहिणी
आराधना मंच द्वारा अपने सम्मान से अभिभूत शारदा तिवारी ने आराधना मंच के सभी समाजसेवी सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापन व होली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सबसे सफल वही महिला है जो गृहिणी कहलाती है। गृह कार्यों में दक्ष होने के अलावा अपना घर परिवार सम्हालती है और समाज सेवा के लिए भी समय निकाल लेती है। उन्होंने इस अवसर पर ‘इतिहास के पन्नाो में है नारी की गाथा सर्वर्था’ नामक कविता का सुमधुर पाठ कर नारी शक्तियों में ओज का संचार किया तथा प्राचीन महान नारियों का उल्लेख कर उपस्थित नारियों को इन प्रातः स्मरणीय नारियों से सीख लेने की बात कही।






