दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट में दिए एक एफिडेविट में बताया कि सरकार जिस मंशा से शराब की कीमत पर छूट दी जा रही थी, उसे लाइसेंसधारक विक्रेता ग्राहकों तक नहीं पहुंचा रहे थे और अनियमित छूट लोगों को उनकी क्षमता से ज्यादा शराब पीने के लिए प्रेरित कर रही थी।
यह बात सरकार ने शराब की कीमतों पर छूट वापस लेने की वजह बताते हुए एफिडेविट में कही है। सरकार ने आगे कहा कि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इस तरह की छूट से शराब की जमाखोरी और भविष्य में कालाबाजारी बढ़ सकती है। सरकार ने कहा कि अगर फरवरी और दिसंबर की बिक्री का आंकड़ा देखें तो फरवरी में बहुत ज्यादा उछाल आया है।
हालांकि लोगों के उपभोग में उतनी वृद्धि नहीं हो सकती क्योंकि लोगों की संख्या इतने कम समय में बढ़ नहीं सकती। यह सिर्फ इसलिए था क्योंकि लोग सस्ती शराब होने के चलते ज्यादा मात्रा में खरीद रहे थे। सरकार की कोई ऐसी मंशा नहीं थी कि शराब में छूट देकर बाजार में अस्वस्थ प्रतियोगिता का माहौल पैदा करे।
