रायपुर। धर्मग्रंथों में महाशिवरात्रि पर्व को भगवान शिव और शक्ति का मिलन पर्व कहा गया है। महाशिवरात्रि की पूजा रात्रि के चार प्रहर में करना उत्तम माना गया है। जिस दिन त्रयोदशी-चतुर्दशी तिथि का संयाेग हो, उसी दिन महाशिवरात्रि पूजा करनी चाहिए। इस बार एक मार्च को त्रयोदशी-चतुर्दशी के संयोग में महाशिवरात्रि पांच ग्रहों यानी पंचग्रही संयोग में मनाई जाएगी।
एक दिन पहले एक समय भोजन करें
ज्योतिषाचार्य पं.अभिऋषि शर्मा के अनुसार महाशिवरात्रि से एक दिन पहले त्रयोदशी तिथि पर श्रद्धालुओं को एक समय ही भोजन करना चाहिए। शिवरात्रि के दिन, सुबह नित्य कर्म करने के बाद, पूरे दिन के व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प के दौरान, भक्तों को मन ही मन अपनी प्रतिज्ञा दोहरानी चाहिए और भगवान शिव से व्रत को निर्विघ्न रूप से पूर्ण करने का आशीर्वाद मांगना चाहिए।
सूर्योदय के बाद व्रत का पारण
पं.शर्मा के अनुसार शिवरात्रि के दिन भक्तों को संध्याकाल स्नान करने के बाद ही पूजा करना चाहिए और मंदिर में शिव प्रतिमा अथवा शिवलिंग का दर्शन करने अवश्य जाना चाहिए। शिव भगवान की पूजा रात्रि के समय करना चाहिए और अगले दिन स्नानादि के बाद व्रत का पारणा करना चाहिए।
व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए सूर्योदय और चतुर्दशी तिथि के अस्त होने के मध्य के समय में ही व्रत का समापन करना चाहिए। एक अन्य धारणा के अनुसार, व्रत के समापन का सही समय चतुर्दशी तिथि के बाद का बताया गया है। दोनों ही अवधारणा परस्पर विरोधी हैं। लेकिन, ऐसा माना जाता है कि, शिव पूजा और पारण (व्रत का समापन), दोनों चतुर्दशी तिथि अस्त होने से पहले करना चाहिए।
रात्रि के चार
शिवरात्रि पूजा रात्रि के समय करें। यदि रात्रि के चार प्रहर में चार बार पूजा करें तो इसका विशेष फल मिलता है। एक मार्च की रात्रि में निशीथ काल में 49 मिनट तक सर्वश्रेष्ठ शुभ समय है। निशीथ काल की पूजा रात्रि 11:51 बजे से लेकर 12:40 बजे तक यानी 49 मिनट तक करें। अगले दिन दो मार्च व्रत का पारणा सुबह 6.23 बजे के बाद
करें।
प्रथम प्रहर पूजा – शाम 6.08 से रात्रि 09.12 बजे
द्वितीय प्रहर – रात्रि 09.12 से रात्रि 12.16 बजे
तृतीय प्रहर – रात्रि 12.16 से रात्रि 03.19 बजे
चतुर्थ प्रहर – रात्रि 03.19 से सुबह 06.23 बजे
