रायपुर। रायपुर नगर निगम की माली हालत खराब होने के पीछे शहर के बड़े रसूखदार बकायेदार है जो करोड़ों रूपये का कर सालों से दबाकर बैठे है।जब-जब निगम का राजस्व अमला वसूली करने इन रसूखदारों के पास पहुंचता है उपर से फोन कर अमले को वापस लौटा दिया जाता है।
जनवरी महीने का वेतन फरवरी में मिला
राजस्व की वसूली न होने के कारण ही जनवरी महीने का निगम के अधिकारी-कर्मचारियों को वेतन फरवरी में देना पड़ा,वह भी शासन से 10 करोड़ मिलने के बाद।अब निगम प्रशासन ने इन बकायेदारों के नाम सार्वजिनक कर वसूली अभियान चलाया है। कर का भुगतान नही करने वालों की संपत्ति कुर्क करने के फैसले ने रसूखदारों की चिंता बढ़ा दी है।
आम लोगों से टैक्स वसूलने में सख्ती
चौंकाने वाली बात यह है कि 10-10 सालों से टैक्स नहीं देने वाले रसूखदारों पर निगम अभी भी मेहरबानी दिखा रहा है ।निगम ने आम लोगों के घरों से टैक्स वसूली में सख्ती दिखाई, लेकिन रसूखदारों को लगातार छूट देती रही। पिछले दिनों नगर निगम ने राजधानी के 10 जोन में 100 से अधिक बकायेदारों के नाम जारी किए था, जिससे लगभग 10 करोड़ से अधिक की राशि प्रापर्टी टैक्स के रूप में वसूल करनी है, लेकिन ये बकायेदार एक-दो वर्ष से नहीं बल्कि करीब 10-10 वर्षों से प्रापर्टी टैक्स की राशि दबाएं बैठे हैं।
बड़े बकायेदारों का राजनीतिक दलों से ताल्लुक
इन बकायेदारों में बिल्डर, उद्योगपति, कालोनाइजर्स, शो-रूम संचालक, गोदाम, लकड़ी कारोबारी, आटोमोबाइल्स सेक्टर, होलसेल कारोबारी आदि शामिल हैं। नगर निगम द्वारा जारी सूची में ऐसे कई रसूखदारों के भी नाम हैं, जो कि किसी ना किसी बड़े राजनीतिक पार्टी से भी ताल्लुक रखते हैं। जारी सूची में 10 साल से भी अधिक पुराने बकायेदारों के नाम शामिल हैं। इनमें नेता, कारोबारी, होटल संचालक,फैक्टरी संचालक आदि है।
