संस्कृत विभाग में अंतर्विभागीय व्याख्यान का आयोजन
राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. के.एल.टांडेकर के मार्गदर्शन में संस्कृत विभाग, विभागाध्यक्ष डॉ. दिव्या देशपांडे के निर्देशन में सम्प्रेषण कला एवं प्रिंट मीडिया का परिदृश्य विषय में अंतर्विभागीय व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में पत्रकारिता विभाग के प्राध्यापक अमितेश सोनकर उपस्थित थे। कार्यक्रम के शुरुआत सरस्वती वंदना कर किया गया।

मुख्य वक्ता श्री सोनकर ने संप्रेषण कला की महत्ता, पत्रकार के गुण एवं संस्कृत में पत्रकारिता के अवसरों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया के चलते हर एक विद्यार्थी एवं भारत के सभी नागरिक अपने आप में एक पत्रकार हैं पत्रकार किसी पर्टिकुलर पत्रकारिता विषय से नहीं बल्कि सभी विषय की विद्यार्थियों के लिए इस क्षेत्र में आने के लिए अवसर प्रदान करता है इसके लिए लेखन शैली के साथ हर एक विषय के बारे में जानकारी रखना आवश्यक है, एक पत्रकार को निष्पक्षता, रोचकता, सत्यता, प्रभावशाली जैसे मुख्य तत्वों पर विशेष ध्यान देकर कार्य किया जा सकता है।
वही श्री सोनकर ने पत्रकारिता हमेशा से अपने महान् लक्ष्यों, शिक्षित करने, जागरूक करने एवं सूचना देने का काम करती आ रही हैं इसलिए इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी कहा जाता है। सम्प्रेषण कला के तहत परंपरागत सम्प्रेषण एवं आधुनिक संप्रेषण माध्यम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
संस्कृत के विद्यार्थियों को पत्रकारिता के क्षेत्र में एक अनुवादक के रूप में व आपके पत्र वाले कालम पर अपना लेख प्रकाशित कराने की बात कही।
इस कार्यक्रम का संचालन संस्कृत विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. ललित प्रधान आर्य तथा आभार प्रदर्शन डॉ. महेंद्र नागपुरे द्वारा किया गया। इस अवसर पर विभाग के स्नातकोत्तर के विद्यार्थी उपस्थित थे।
