छत्तीसगढ़ में मिशन इंद्रधनुष 4.0 की शुरुआत हो चुकी है। सात फरवरी से शुरू हुए इंद्रधनुष मिशन 4.0 का उद्देश्य नियमित टीकाकरण में तेजी लाना है। फिलहाल इसकी शुरुआत राज्य के पांच जिलों से की गई है, जिसमें राज्य का बस्तर, धमतरी, दुर्ग, कांकेर एवं राजनांदगांव जिला शामिल हैं।
अभियान के तहत नियमित टीकाकरण से छूटे जन्म से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, पोलियो, डिप्थेरिया, टिटनेस, कुकुर खांसी, हेपेटाइटिस-बी, हिमोफिलियस, इन्फ्लुएंजा-बी, रोटावायरस, निमोनिया, दिमागी बुखार, खसरा, रूबेला, एवं जैपजीन, इन्सेफेलाइटिस के टीके लगाए जा रहे हैं। राज्य में चिन्हित जिलों में प्रथम चरण में 2199 सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
वहीं गर्भवती माताओं को टीडी-1, टीडी-2 और बूस्टर टीडी के टीके लगाए जाएंगे। अभियान में 5400 से अधिक दो वर्ष तक के बच्चे व 2600 से अधिक गर्भवती माताएं टीकाकृत होंगी। सभी टीकाकरण सत्र जिलों के चिन्हाकित ग्रामों के आंगनबाड़?ी केन्द्रों में आयोजित किए जाऐंगे।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन छत्तीसगढ़ की डा. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि यह अभियान राज्य में तीन चरणों में संचालित किया जा रहा है। इसमें प्रथम चरण सात फरवरी से 13 फरवरी, द्वितीय चरण सात मार्च से 13 मार्च व तृतीय चरण चार से 10 अप्रैल तक संचालित किए जाएंगे। प्रत्येक चरण सात दिवस के होंगे।
छूटे हुए बच्चों की सूची है तैयार
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित मिशन इंद्रधनुष 4.0 के तहत उक्त पांचों जिलों में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं मितानिनों द्वारा गृह भ्रमण कर नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों का चिन्हांकन कर सूची बनाई गई है। अभियान के अंतर्गत जन्म से दो वर्ष तक के 5435 बच्चें व 2604 गर्भवती माताओं को टीकाकृत किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान के जरिए नियमित टीकाकरण से वंचित बच्चों को टीका लगाया जाएगा।
