सार
प्रतापगढ़ जिले के कुंडा विधानसभा क्षेत्र में अभी नामांकन नहीं हुआ है, लेकिन यहां गुरु-शिष्य आमने-सामने होंगे। यहां के विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया अपनी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रितक से मैदान में उतर रहे हैं तो सपा ने गुलशन यादव को मैदान में उतार दिया है।

सियासत में कुछ भी स्थायी नहीं होता है। यही वजह है कि कहीं गुरु-शिष्य मैदान में हैं, तो कहीं गलबहियां करने वाले दोस्तों में दुश्मनी हो गई है। वे मतदाताओं के बीच एक-दूसरे की कारगुजारियां गिनाते हैं। घटनाओं का जिक्र कर ललकारते हैं। कहीं दोस्त पर धोखा देने का आरोप लगा रहे हैं, तो कहीं खुद के साथ हुई नाइंसाफी गिना रहे हैं। कई जगह चुनावी जंग में रास्ते अलग-अलग हो गए हैं। इन सीटों पर इसलिए भी मुकाबला रोचक है, क्योंकि दोनों एक-दूसरे की चाल को समझते हैं। दोनों के बीच शह और मात का खेल भी जारी है। पेश है प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों की कुछ ऐसी ही कहानियां बयां करती चंद्रभान यादव की रिपोर्ट…
कुंडा विधानसभा क्षेत्र में गुरु-शिष्य आमने-सामने
प्रतापगढ़ जिले के कुंडा विधानसभा क्षेत्र में अभी नामांकन नहीं हुआ है, लेकिन यहां गुरु-शिष्य आमने-सामने होंगे। यहां के विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया अपनी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रितक से मैदान में उतर रहे हैं तो सपा ने गुलशन यादव को मैदान में उतार दिया है। यह वही गुलशन यादव हैं, जिन्होंने राजा भैया की सरपरस्ती में सियासत में कदम रखा। बसपा सरकार में राजा भैया के खिलाफ पोटा लगा था। गवाह राजेंद्र यादव की सनसनीखेज हत्या का आरोप गुलशन पर लगा। इसी तरह सीओ जियाउल हक हत्याकांड में भी राजा भैया के साथ गुलशन और छविनाथ पर आरोप लगा। वर्ष 2011 में गुलशन यादव कुंडा नगर पालिका के चेयरमैन बने। इसके बाद राजा भैया से राहें जुदा हुईं। पिछले चुनाव में राजा भैया के विरोध के बावजूद गुलशन की पत्नी चेयरमैन बनीं तो सियासी दुश्मनी बढ़ गई। जनसभाओं में गुलशन यादव राजा भैया के खिलाफ आग उगल रहे हैं। खुद के साथ हुए अन्याय की दुहाई देकर वोट मांग रहे हैं। यहां का मुकाबला दिलचस्प है। क्योंकि, दोनों ही नेता एक-दूसरे की चालों को बखूबी जानते हैं।
सैफुर्रहमान और पूर्व विधायक अजीम भाई की दोस्ती अब दुश्मनी में बदली
फिरोजाबाद की सदर सीट से सपा के टिकट पर मैदान में उतरे सैफुर्रहमान और पूर्व विधायक अजीम भाई की दोस्ती अब दुश्मनी में बदल गई है। अजीम की पत्नी साजिया हसन बसपा के टिकट पर मैदान में हैं। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक अजीम भाई अब पत्नी के लिए वोट मांग रहे हैं। अभी तक दोनों जिगरी दोस्त साथ-साथ सियासत में सक्रिय थे। हमेशा साथ दिखने वाले ये नेता अब जनसंपर्क के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलते दिख रहे हैं। जेल जाने की कहानी से लेकर विभिन्न घटनाओं का बखान करते वक्त एक-दूसरे को दोषी ठहराया जा रहा है। अजीम आरोप लगाते हैं कि सैफुर्रहमान ने धोखा दिया, जबकि सैफुर्रहमान का कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें टिकट दिया है। इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। अजीम भाई ने सोशल मीडिया पर भी अपना दर्द बयां किया है।
टिकट कटने पर अंबरीश पुष्कर ने बने सुशीला सरोज के सियासी दुश्मन
लखनऊ की मोहनलालगंज सीट पर भी रोचक मुकाबला हो गया है। यहां से 2017 में सपा का खाता खोलने वाले विधायक अंबरीश पुष्कर ने दो दिन पहले सपा के चिह्न पर नामांकन किया। अगले दिन पुष्कर का टिकट काटकर पूर्व सांसद सुशीला सरोज को मैदान में उतार दिया गया। ऐसे में विधायक पुष्कर ने निर्दल चुनाव लड़ने का फैसला किया है। कभी बीएस-4 के सक्रिय सदस्य रहे अंबरीश पुष्कर को राजनीति में लाने का श्रेय सुशीला सरोज को जाता है। दोनों साथ-साथ विभिन्न कार्यक्रमों में देखे जाते थे, लेकिन विधानसभा चुनाव में टिकट की लड़ाई ने दोनों को सियासी दुश्मन बना दिया है।
तिर्वा सीट पर गुरु के खिलाफ शिष्य ने ठोेेकी ताल
कन्नौज जिले की तिर्वा विधानसभा सीट पर भाजपा ने विधायक कैलाश राजपूत को मैदान में उतारा है। इनके सामने बसपा से अजय वर्मा ने ताल ठोक दी है। वर्ष 2007 में कैलाश और अजय साथ-साथ बसपा में थे। अजय वर्मा ब्लाॅक प्रमुख भी रहे। लेकिन विधानसभा चुनाव में गुरु के खिलाफ शिष्य ने ताल ठोेेक दी है।
उरई सीट पर दो रिश्तेदारों में चुनावी जंग
जालौन जिले के पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी के परिवार में सियासी जंग शुरू हो गई है। खाबरी महरौनी से कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। उनकी पत्नी उर्मिला स्वर्णकार ने कांग्रेस के टिकट पर उरई से पर्चा भरा है। इसी सीट पर खाबरी के दूसरे रिश्तेदार श्रीपाल ने बसपा के टिकट पर पर्चा दाखिल कर दिया है। अब इन दोनों रिश्तेदारों को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। पूर्व सांसद के समर्थक पशोपेश में हैं कि वे किसकी तरफ चुनाव प्रयार करें।
दो परिवारों की दोस्ती सियासी दुश्मनी में बदली
बांदा जिले के बबेरू विधानसभा क्षेत्र में सपा ने विशंभर यादव को उतारा है। पिछली बार बसपा से चुनाव लड़ने वाली किरन यादव कुछ समय पहले सपा में शामिल हुईं। सपा ने टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय मैदान में हैं। दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से चल रही दोस्ती अब सियासी दुश्मनी में बदल गई है।
ललितपुर सीट पर दोनों मौसेरे भाई
ललितपुर सीट पर सपा ने पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा को मैदान में उतारा है। यहां भाजपा ने राम रतन कुशवाहा को मैदान में उतार दिया है। ये दोनों मौसेरे भाई हैँ। साथ-साथ राजनीति करने वाले कुशवाहा बंधु अब आमने-सामने हैं। ऐसे में रिश्तेदारों की मुसीबत बढ़ गई है कि वे किधर जाएं।
