फलों और सब्जियों को अधिक समय तक सुरक्षित रखने के लिए जम्मू के तालाब तिल्लो में अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया जाएगा। इसकी क्षमता पांच हजार मीट्रिक टन की होगी जिसमें कई चैंबर होंगे। यह कोल्ड स्टोरेज आठ महीने में बनकर तैयार होगा। यह फैसला उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई प्रशासनिक परिषद की बैठक में किया गया।
प्रदेश में यह अपनी तरह का पहला कोल्ड स्टोरेज होगा जिसमें ताजे फलों व सब्जियों को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसके निर्माण पर 2646.73 लाख रुपये खर्च होंगे। इससे कृषि व बागवानी उत्पादों को तोड़ने के बाद होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा और अधिक दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।
इससे किसान औने-पौने दाम में इन उत्पादों को बेचने से भी बच सकेंगे। पिछले दो साल में सरकार ने कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों को बढ़ावा दिया है। किसानों की आय बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है।
अब तक 1.98 मीट्रिक टन क्षमता की निजी क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज की स्थापना की गई है जो केवल एक फसल के लिए है। नई व्यवस्था से जम्मू संभाग में विभिन्न फलों और सब्जियों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
शिल्प विकास संस्थान अब उद्योग विभाग के जिम्मे
जम्मू और कश्मीर की कला और शिल्प की जीआई टैगिंग को कारगर बनाने के लिए शिल्प विकास संस्थान (सीडीआई) के प्रशासनिक नियंत्रण के हस्तांतरण को मंजूरी दी। अब सीडीआई का प्रशासनिक नियंत्रण उद्योग और वाणिज्य विभाग के पास होगा, जिससे जम्मू-कश्मीर कला और शिल्प की जीआई टैगिंग को बढ़ावा मिलेगा।
प्रशासनिक परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय का उद्देश्य लक्षित और रणनीतिक योजना के माध्यम से प्रदेश में पारंपरिक, समकालीन, आधुनिक और विविध शिल्प को बढ़ावा देना और विकसित करना है। शिल्प विकास संस्थान विभिन्न शिल्पों को पहचानने, बढ़ावा देने और भौगोलिक संकेतक (जीआई) प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संस्थान ने अब तक पश्मीना, सोजनी, कानी, खटामबंद, पेपरमाची, अखरोट की नक्काशी और कालीन कला के लिए जीआई टैग हासिल करने में सहायता की है। इससे पहले पश्मीना कारीगरों और बुनकरों की सुविधा के लिए सरकार ने कौशल विकास विभाग से पश्मीना परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन केंद्र का प्रशासनिक नियंत्रण उद्योग विभाग को स्थानांतरित कर दिया है।
