पिछले जन्म की कोई आराधना अधूरी रही होगी इसलिए यह जन्म मिला-मुमुक्षु डाकलिया परिवार
राजनांदगांव 24 जनवरी। संयम की राह पर अग्रसर मुमुक्षु भूपेंद्र डाकलिया, उनकी धर्मपत्नी मुमुक्षु सपना डाकलिया, दोनों पुत्र मुमुक्षु देवेंद्र डाकलिया, मुमुक्षु हर्षित डाकलिया एवं दोनों पुत्रियां मुमुक्षु महिमा डाकलिया एवं मुमुक्षु मुक्ता डाकलिया ने आज यहां कहा कि पिछले जन्म की कोई आराधना अधूरी रही होगी इसलिए यह जन्म हमें मिला है। उन्होंने कहा कि इस जन्म में हमारी आराधना पूरी हो, यही हमारी इच्छा है।
स्थानीय जैन बगीचे के ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में आज एक पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व महापौर, सकल जैन श्री संघ के अध्यक्ष एवं पार्श्वनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट समिति के मैनेजिंग ट्रस्टी नरेश डाकलिया ने कहा कि यह राजनांदगांव का पुण्य है और सौभाग्य है कि 27 जनवरी को एक साथ आठ दीक्षा यहां होंगी। आचार्य जिन पीयूष सागर जी के मुखारविंद से इनकी दीक्षा संपन्न होगी। इतनी बड़ी संख्या में दीक्षा राजनांदगांव में कभी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कई जन्मों का पुण्य होता है तो ऐसा दुर्लभ अवसर मिलता है। उनकी इच्छा है कि उनके भतीजे भूपेंद्र डाकलिया का परिवार संयम की राह पर अग्रसर हो और तपस्या कर अपनी मंजिल प्राप्त करें।
मुमुक्षु भूपेंद्र डाकलिया ने कहा कि उन्होंने मनुष्य जन्म की सार्थकता को समझकर यह निर्णय लिया। मनुष्य जन्म बड़ी मुश्किल से मिलता है और पिछले जन्म की कोई आराधना अधूरी रह गई थी इसलिए यह जन्म मिला है । अपनी अधूरी आराधना को वे इसी जन्म पूरा करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि सन 2011 में कैवल्यधाम कुम्हारी में उनकी वैराग्य की इच्छा जागृत हुई थी। उन्होंने 51 दिन का तप भी किया। सन 2012 में चेन्नई में उन्होंने यह तप अपने परिवार के साथ गुरु भगवंतो के सानिध्य में पूरा किया। यह साधु जीवन की ट्रेनिंग थी। इसके बाद उन्होंने एवं परिवार ने अनेक तप किए।
मुमुक्षु भूपेंद्र डाकलिया ने कहा कि धन, वैभव तो सब यहीं रह जाते हैं। दादा गुरुदेव की मूर्ति को देख कर मन में वैराग्य की भावना और प्रबल हो जाती है। उन्होंने कहा कि गुरु भगवंतो के सानिध्य में रहकर वे अपना जीवन सार्थक करना चाहते हैं। आचार्य जिन पीयूष सागर जी ने उन्हें और उनके परिवार को पात्र समझा और 27 जनवरी को वे हमारा हाथ पकड़ लेंगे। उन्होंने कहा कि यह उनका तथा परिवार का, पाठशाला में प्रवेश होगा । इसके बाद गुरु के सानिध्य में उनका संयमी जीवन प्रारंभ होगा। उन्होंने बताया कि उनके परिवार की प्रेरणा स्त्रोत उनकी धर्म सहायिका सपना डाकलिया है। भूपेंद्र डाकलिया ने यह भी बताया कि छह साल की उम्र में उनके छोटे पुत्र हर्षित डाकलिया ने बाल लोच करवाया था।
मुमुक्षु हर्षित डाकलिया ने कहा कि आचार्य श्री जी की जीवन शैली ने उन्हें काफी प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि जब आचार्य श्री के पास वे जाते हैं तो उनके तपस्वी जीवन को देखकर लगता है कि ऐसा ही जीवन जीना चाहिए और इसी वजह से उन्होंने संयम का मार्ग चुना। पत्रकार वार्ता में नरेश डाकलिया के अलावा आयोजन समिति के संयोजक भावेश बैद, कोषाध्यक्ष रोशन गोलछा, सुशील छाजेड़ , रितेश लोढ़ा, मुमुक्षु भूपेंद्र डाकलिया के भाई योगेश डाकलिया, आकाश चोपड़ा , प्रसन्न गोलछा, रमेश बैद, प्रकाश लालवानी, मनोज झाबक और मनीष कोठारी भी उपस्थित थे।
