राजनांदगांव. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सर्वाधिक लोकप्रिय महानायक अद्वितीय देशभक्त नेताजी सुभाषचंद्र जी की 125वीं परमपुण्यात्म जयंती परिप्रेक्ष्य में नगर के विचारविज्ञ प्राध्यापक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने विशेष विचार चिंतन टीप में बताया कि देश की आजादी की निर्णायक संग्राम के प्रमुख सूत्रधार महान क्रांतिकारी, प्रखर सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस माँ भारती के विरले- विलक्षण, लाड़ले-सपूत हुए। जिनके अतीव प्रभावी कुशल नेतृत्व में आजाद हिंद फौज के द्वारा अंग्रेजों के विरूद्ध गहन संघर्ष ने ही भारत की प्रथम स्वतंत्र सरकार स्थापित की थी और भारत से बर्लिन की 35 हजार किलोमीटर लंबी यात्रा करके आजाद हिन्द फौज को सशक्त, समृद्ध बनाकर देश को गौरवशाली स्वाधीनता प्राप्त करने में उल्लेखनीय भूमिका अदा की। कदम-कदम बढ़ाये जा, खुशी के गीत गाये जा, यह जिंदगी है कौम की, तू कौम पर लुटाये जा। जैसे कूच गीत एवं तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा, आजाद हिन्द! जय हिन्द! जैसे बुलंद नारों के माध्यम से देश के सर्व जन-गण में जोश भरके अद्म्य साहस परम वीरता के साथ नेतृत्व करने वाले सुभाष जी का समग्र व्यक्तित्व एवं कृतित्व युवा-किशोर-प्रबुद्ध एवं नेतृत्वकर्ता पीढ़ी के लिए आदर्शतम उद्हरण है तथा राष्ट्र-भक्ति-सेवा का असीम, अपार प्रेरणा स्रोत भी है। आगे प्राध्यापक द्विवेदी ने विशेष आह्वान में कहा कि विशुद्ध, आदर्श, प्रबुद्ध व्यक्तित्व के धनी नेताजी सुभाष का अगाध देशप्रेम, राष्ट्र भक्ति एवं सेवा का अनूठा आयाम एवं प्रगाढ़, राष्ट्र-बोधत्व की प्रबल भाव-भावनाओं को हम सभी मन-प्राण-प्रण से हृदयगंम कर देश-धरती की पूर्ण समृद्धि, विकास के लिए कार्य करने लगे तो विश्वगुरू रहे हमारे देश को पुन: विश्व का सिरमौर राष्ट्र सहज सरलता से बना सकेंगे। यही नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी के प्रति सर्वजन-जन की सच्ची सार्थक श्रद्धांजलि होगी। आईये नेताजी सुभाषचंद्र के महानायकत्व व्यक्तित्व के संदेश को हम सभी धारण करें और उनके संपूर्ण समृद्धि संपन्न राष्ट्र के निर्माण के भव्य स्वप्न को साकार करने की विकास यात्रा में प्रत्यक्षत: सहभागी बनें।
