अलीगढ़- त्रिमूर्ति नगर के बैंक कर्मी के 16 साल के बेटे के अपहरण और हत्या जैसी संगीन वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी 18 से 20 साल के हैं। इतनी छोटी उम्र में इन आरोपियों के दिमाग में क्राइम सीरियल देखकर अपहरण और हत्या की कहानी आई। तीनों ने अपना शिकार तलाशा तो उनके सामने अभिषेक सामने आया। दरअसल, अभिषेक के घर में पल्सर मोटर साइकिल और पिता की बैंक में नौकरी होने की चकाचौंध से आरोपियों ने उसके अपहरण की कहानी रची। टिकटॉक वीडियो के शौक को इसका आधार बनाया गया। मुख्य भूमिका शिवम ने निभाई।
शिवम ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसे व अनिकेत और बाबू को घूमना-फिरना और ऐश मौज काटना पसंद है। इसके लिए पैसे चाहिए थे। क्राइम सीरियल में सगे दोस्त की के अपहरण की कहानी देखी तो अपने दोस्त अभिषेक के अपहरण की साजिश रच ली। शिवम के मुताबिक शुक्रवार दोपहर को फोन कर घर से बुलाने के बाद उसे भांकरी से आगे एक बंद फैक्टरी में लेकर गए। वहां अपहरण कर रखने की व्यवस्था न बनी तो उसे वीडियो बनाने के बहाने एक स्कूटर और एक मोटर साइकिल पर साथ लेकर गभाना क्षेत्र के पला सल्लू गांव से गुजर रही नगर के बीचोबीच ले गए। नहर सूखी पड़ी है। वहां अभिषेक के हाथ पैर बांध दिए। उसने विरोध किया तो पिटाई लगा दी। इसके बाद उसके ही फोन से उसके पिता के साथ काम करने वाले मयंक अग्रवाल को फोन कर 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी।
पिता की बातों से लगा कि वह पैसे दे देगा। पैसे मिलने की बात पर निश्चित होने पर अभिषेक को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद शव को वहीं छुपा दिया। परिवार वालों को उसके जिंदा होने की बात बताते रहे। इस बीच सभी अपने-अपने घर आ गए। बाद में शिवम का फोन बंद कर अपने फोन से शिवम के परिवार से संपर्क किया। पकड़े जाने के डर से राजू ढाबे और साईं मंदिर पर फिरौती की रकम लेने नहीं पहुंचे थे।
वारदात में आरोपी अनिकेत बरौला इलाके के एक प्रॉपटी डीलर का बेटा है। उसने अपने पिता को पूरा वाकया बता दिया था। पिता ने मामले को पुलिस के पास पहुंचाने के बजाय बेटे का जुर्म छुपाने को उसे फरार कर दिया। मगर, अनिकेत फिर से घर लौटकर पिता के पास पहुंच गया। पुलिस ने उसे और उसके पिता को घर से उठाया।
शिवम ने वारदात के लिए पूरी प्लानिंग बेहद संगीन अपराधी के तौर पर रची थी। जिस नंबर से उसने फोन कर फिरौती मांगी थी वह नंबर उसके बहनोई का था, जो कि कई माह पहले फोन गुम हो जाने के चलते बंद था। मगर. शिवम ने बहनोई की आईडी से गुपचुप तौर पर दुबारा से उक्त नंबर को जारी कराया था, उसे लगा था कि वह ऐसा करने से पकड़ा नहीं जाएगा। मगर, सर्विंलांस की टीम ने सिम नंबर और मोबाइल के आईएमईआई नंबर से उसकी लोकेशन ट्रेस कर थाना पुलिस को बता दी। इससे पूरी वारदात का 24 घंटे में राजफाश हो गया।
रात में इस घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने एसपी सिटी अभिषेक के निर्देशन में सीओ द्वितीय पंकज श्रीवास्तव के नेतृत्व में बन्नादेवी इंस्पेक्टर रविंद्र दुबे के अलावा क्वार्सी इंस्पेक्टर छोटेलाल, जवां एसओ अभय कुमार, एसओजी/सर्विलांस प्रभारी संजीव कुमार की टीम को लगाया। शाम को थाने पहुंचे एसएसपी ने रात भर के प्रयास में खुलासा करने पर टीम की पीठ ठोंकी।
