राजनांदगांव. छत्तीसगढ़ महतारी के अमर सपूत पं.सुन्दरलाल शर्मा की परमपुण्य जयंती के महत्तम परिप्रेक्ष्य में नगर के विचारप्रज्ञ प्राध्यापक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने विशेष स्मरण चिंतन टीप में बताया कि पं. सुन्दरलाल शर्मा छत्तीसगढ़ में राष्ट्रबोध जागरण के श्रेष्ठतम अग्रदूत हुए। जिन्होंने समग्र जीवन कार्य व्यवहार में राष्ट्रबोध मातृभूमि, सेवा, दलित उद्धार के सैद्धांतिक आदर्शो को मन-प्राण से स्वीकार कर सार्वजनिक रूप से स्थापित करने वाले प्रथम महापुरूष हुए हैं। जन-जन सर्वजन में राष्ट्रीयता की श्रेष्ठ भावना का विकास करने अस्पृश्यता निवारण, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग-उपभोग को बढ़ाने की अनुपम पहल की इसलिए पं. शर्मा को इसीलिए छत्तीसगढ़ का गांधी कहा गया है। देश-धरती की पावन माटी से जुड़े ठेठ दार्शनिक चिंतन, लेखन तथा आजादी के अलख जगाने वाले अद्भुत नारे, गीत एवं विचार देने वाले पं. सुन्दरलाल शर्मा के अद्वितीय व्यक्तित्व – कृतित्व ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ-साथ तत्कालीन स्वाधीनता आंदोलन का नेतृत्व करने वाले महात्मा गांधी सहित सर्व प्रमुख नेताओं को आकर्षित किया और हरिजन उद्धार की उनकी अनूठी पहल को सभी ने स्वीकार कर संपूर्ण देश में प्रारंभ किया। आगे प्राध्यापक द्विवेदी ने विशेष रूप से वर्तमान, युवा, किशोर और प्रबुद्ध पीढ़ी के लिए राष्ट्रबोधत्व के सद संकल्प के लिए पं. सुन्दरलाल शर्मा के कार्यो, विचारों को आत्मसात करने के लिए प्रादर्श संदर्भ महापुरूष बताया तथा उनके बताये पथ पर चलने का आह्वान किया। वर्तमान संदर्भ पं. सुन्दरलाल शर्मा का विचार दर्शन अतीव सामयिक है।
