भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को देखते हुए राज्य शासन का निरंतर ध्यान आकृष्ट किया है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि जिन किसानों के नाम पर लोकलुभावन वादे कर चुनाव जीतने के बाद न सिर्फ सरकार अपने वादे को भूल गयी। वरना अपने वादे से मुकर भी रही है। एक एक बीज धान खरीदने के वादे से बनी सरकार नित नए नियमों के बंधन में किसानों को खेती करने के लिए ही हतोत्साहित करती दिख रही है।
भारतीय किसान संघ ने कहा चाहे वह अमानक बीज वितरण की बात हो, चाहे रकबा कटौती हो, चाहे खाद की समस्या हो, चाहे बिजली बिल में बढ़ोतरी हो, चाहे सीमित टोकन व्यवस्था की बात हो या बारदाने की बात हो अथवा मंडी टैक्स में बढ़ोतरी हो या धान खरीदी की अवधि को लेकर देखे तो केवल किसान परेशान ही होता दिख रहा।
दूसरी ओर इन सभी समस्याओं के विषय पर समय से पूर्व भारतीय किसान संघ ने सरकार को ज्ञापन के माध्यम से अवगत भी कराया है। बावजूद इन समस्याओं के निराकरण करने के बजाय सरकार नए नए बहाने और नए-नए नियमों से किसानों को परेशान ही कर रही है। इन्हीं सभी समस्याओं को देखते हुए एवं सरकार के किसानों के प्रति उदासीन रवैये को ध्यान में रखते हुए 20 दिसंबर को भारतीय किसान संघ द्वारा पूरे छत्तीसगढ़ के ब्लॉक एवं जिला मुख्यालयों पर एक ही दिन धरना प्रदर्शन एवं ज्ञापन देने का निर्णय लिया है।
जिसकी सरकार स्वयमेव ही जिम्मेदार है। क्योंकि इस समय जब किसान अपने फसल को समेटकर समितियों और मंडियों में बेचने को छोड़कर अगर सड़क पर उतर रहा है तो सहज रूप से समझा जा सकता है कि किसान कितने पीड़ित शोषित और इस सरकार में अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है।
