उत्तराखंड समेत देश के तमाम हाथी बाहुल्य राज्यों में मानव- हाथी संघर्ष रोकने के लिए परंपरागत तरीकों के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए वन्य जीव संस्थान के साथ ही कई अन्य संस्थानों के वैज्ञानिक ऐसे उपकरण विकसित करने में लगे हैं जिनसे एलीफैंट कॉरिडोर के आसपास गांवों में ग्रामीणों को हाथियों के मूवमेंट और उनकी तात्कालिक आक्रामकता के बारे में सचेत किया जा सके।
कुछ दिन पहले भारतीय वन्यजीव संस्थान में हुए सेमिनार में देश के नामचीन वन्यजीव विज्ञानियों ने मानव- हाथी संघर्ष के बढ़ते आंकड़ों पर चिंता जताते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर जोर दिया था। उनके मुताबिक समय रहते यदि हाथियों के मूवमेंट और उस दौरान हाथियों की मनोदशा का आंकलन हो सके तो ग्रामीणों को अलर्ट किया जा सकता है। साथ ही केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से शुरू किए गए प्रोजेक्ट एलीफैंट के तमाम पहलुओं को कड़ाई से लागू किए जाने की बात कही गई।
सेमिनार में हिस्सा लेने वाले भारतीय वन्यजीव संस्थान के एलीफेंट सेल के वन्यजीव विज्ञानी डॉ लक्ष्मीनारायणनन और वरिष्ठ वन्यजीव विज्ञानी डॉक्टर बिलाल हबीब ने हाथियों के क्षेत्र में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप और उनके प्राकृतिक पर्यावासों में भोजन, पानी की कमी को मानव- हाथी संघर्ष के लिए काफी हद तक जिम्मेदार माना है। डब्लूटीआई के संयुक्त निदेशक डॉ संदीप कुमार तिवारी का मानना है कि यदि हां मानव- हाथी संघर्ष को रोकना है तो एलीफेंट रिजर्व में एलीफेंट फ्रेंडली लैंड यूज पॉलिसी तैयार करनी होगी।
तीन साल में 300 हाथियों और 1401 इंसानों की हुई मौत
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले तीन साल के भीतर देश के तमाम राज्यों में मानव- हाथी संघर्ष में जहां 300 हाथियों की मौत हो गई, वहीं 1401 लोग हाथियों के हमले में मारे गए। साल 2018-19 में जहां 115 पक्षियों की मौत हुई, वहीं 2019-20 में 99 और 2020-21 में 87 हाथियों की मौत हो चुकी है।
चारे-पानी की कमी से आबादी क्षेत्र में दाखिल हो रहे हाथी
वन्यजीव विज्ञानियों की मानें तो देश के तमाम एलीफेंट रिजर्व व टाइगर रिजर्व में पर्याप्त चारे और पानी की कमी की वजह से हाथी आबादी की ओर रुख कर रहे हैं परिणामस्वरूप मानव- हाथी संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही है। हालांकि हाथियों को आबादी क्षेत्र में दाखिल होने से रोकने को लेकर एलीफैंट प्रूफ ट्रेंच, सोलर फेंसिंग, दीवारों के निर्माण के साथ ही कई परंपरागत तरीके अपनाए जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद मोनू हाथी संघर्ष के घटनाएं कम नहीं हो रही है जो चिंता का विषय है।
पूरी दुनिया में है 60 हजार हाथी, देश में अब 30 हजार
आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरी दुनिया में वर्तमान समय में 60 हजार के करीब हाथी है। साल 2017 में कराई गई गणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में हाथियों की संख्या 30 हजार है। उत्तराखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल समेत देश के 22 राज्यों में हाथी पाए जाते हैं। जहां तक सबसे अधिक हाथियों वाले राज्य का सवाल है तो कर्नाटक में सबसे अधिक हाथी पाए जाते हैं।
