राजनांदगांव । प्रधानमंत्री द्वारा देश से माफी मांगते हुए तीन कृषि कानूनों की घोषणा को जिला किसान संघ ने लोकतंत्र की जीत कहा है । उल्लेखनीय है शुक्रवार को देश के नाम संदेश संदेश में पूरे देश से माफी मांगते हुए प्रधानमंत्री ने आगामी संसद सत्र में तीन कानून वापस लेने की बात कही एवं प्रकाश पर्व के लिए किसानों से घर वापस लौटने की अपील की ।
प्रधानमंत्री के देश के नाम संदेश के तुरंत बाद किसान काफी संख्या में जय स्तंभ चौक में एकत्रित हुए पटाखे फोड़े एवं मिठाइयॉ बांटकर खुशी का इजहार किया । वही मिडीया से बातचीत में इसे न सिर्फ किसान आंदोलन की जीत बल्कि तमाम जनवादी संघर्षो एवं लोकतंत्र की जीत बताया । आने वाली सरकारों के लिए भी एक संदेश है, कि तानाशाही पूर्ण किये निर्णयों को देश की जनता कभी स्वीकार नही करेगी ।
जिला किसान संघ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा हैै, कि प्रधानमंत्री ने देश से माफी जरूर मांगी है पर आंदोलन में शहीद किसानों के प्रति कोई भी संवेदना व्यक्त नहीं की है ऐसे में इसका कोई अर्थ नहीं है । जब तक शहीद किसानों को न्याय नही मिलता, समर्थन मूल्य गारंटी कानून और श्रम कानूनों पर सकारात्मक पहल नही होती है । देश कभी माफ नही करेगा । लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों के हत्या के जिम्मेदार गृह राज्यमंत्री को कैबिनेट में रखते हुए माफी मांगना घड़ीयाली आंसू से ज्यादा कुछ नही है ।
शहीद किसानों के बलिदान किसान मजदूर एकजुटता किसान आंदोलन का दृढ़ संकल्प और संयुक्त किसान मोर्चा के ईमानदार और कुशल नेतृत्व के आगे आखीरकार मोदी सरकार को नतमस्तक होना पड़ा है ।
तीन कृषि कानूनों की वापसी से जहां कृषि क्षेत्र पर कापोॅरेट कब्जे, देश की खाद्य सुरक्षा, देश की संप्रभुता पर से खतरा टला है । पर कृषि क्षेत्र के सुधार के प्रमुख कदम समर्थन मूल्य के अधिकार पर कोई प्रगति नही है । न ही श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव पर सरकार ने अपनी मंशा स्पष्ट की है । ऐसे में संघर्ष जारी रखने की आवश्यकता बनी हुई है ।
अलबता सरकार के झुकने से जनवादी संघर्षो के जीत का सिलसिला शुरू होने का संतोष जरूर है । इससे तमाम संघर्षो को ऊर्जा और प्रेरणा अवश्य मिली है ।
