पंजाब में डेंगू बेकाबू हो गया है। सूबे में इस बीमारी ने पिछले चार वर्ष का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जबकि मौतें तीन गुना ज्यादा दर्ज की गई हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 16,450 लोगों में डेंगू की पुष्टि और 66 लोगों की मौत हुई है। इससे पहले सालों में डेंगू से मौतों का आंकड़ा 18 से 22 के बीच रहता था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार सबसे ज्यादा खराब हालात मोहाली के हैं। इस जिले में अब तक डेंगू के 2457 मामले आए हैं और 31 से ज्यादा मरीजों की मौत हुई है। बठिंडा में 2063 पॉजिटिव मरीज व चार की मौत, होशियारपुर में 1465, अमृतसर में 1461 और पठानकोट में 1434 डेंगू के मामले और एक संक्रमित की मौत दर्ज की गई है।
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डेंगू बढ़ने के कारण
इस बार मानसून 10 दिन की देरी से आया। उसके बाद पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ, जिससे बारिश का क्रम नहीं टूटा, जो मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल साबित हुआ। पिछले सालों के मुकाबले इस बार जांच तीन गुना ज्यादा हो रही हैं। पिछले साल 30 लैब डेंगू के सैंपल की जांच करती थी, इस बार 39 लैब काम कर रही हैं।
सूरज डूबने से पहले ज्यादा एक्टिव रहते हैं मच्छर
पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एडिशनल प्रोफेसर रविंद्रा खैवाल के मुताबिक आगामी दिनों में बारिश के आसार नहीं हैं। इससे डेंगू के केसों में कमी आने की उम्मीद है। सूरज डूबने से दो से तीन घंटे पहले मच्छर ज्यादा एक्टिव होते हैं, ऐसी स्थिति में स्थानीय निकाय विभाग को शाम के वक्त फॉगिंग पर ज्यादा फोकस करना होगा। शाम के वक्त लोग सतर्क रहें।
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सर्वे में ये विभाग मिले जिम्मेदार
स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में खुलासा हुआ है कि स्थानीय निकाय और ग्रामीण विकास विभाग के साथ-साथ ग्राम पंचायतें इस बीमारी के प्रकोप को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई करने में विफल रहीं। अब सरकार इसकी समीक्षा करने में जुट गई है।
सूबे में पांच वर्षों में आए डेंगू के मामले
वर्ष मामले मौत
2021 16450 66
2020 8435 22
2019 10289 14
2018 14980 09
2017 15398 18
