राजनांदगांव। जिले में 300 से अधिक मान्यता प्राप्त प्रायवेट विद्यालय संचालित हो रही है, लेकिन कई विद्यालय सिर्फ कागजों में खानपूर्ति कर संचालित किए जा रहे है तो वहीं कई ऐसे भी स्कूल संचालित हो रही है, जिसकी जानकारी शिक्षा विभाग को भी नहीं है। सुविधाहीन और अवैध प्रायवेट विद्यालयों की संख्या भी कम नहीं है। वैसे तो शिक्षा विभाग ने 150 से अधिक नोडल अधिकारी नियुक्ति किए है, जिन्हें प्रायवेट विद्यालयों की जानकारी रखनी होती है, लेकिन पैसे के आगे कानून और नियम निर्देश सब धरा का धरा रह जाता है।
खैरागढ़ में तो इन दिनों दो स्कूल चर्चा का विषय बना हुआ है, जिनका नाम मिलता जूलता है और शायद संचालनगण भी एक ही संस्था से संबंध रखते है, लेकिन कौन सा स्कूल कहां संचालित हो रहा है और शिक्षा विभाग से किसको स्कूल संचालित करने की अनुमति मान्यता मिला है, इसको लेकर अब शिकायतों का दौर आरंभ हो चुका है और जल्द कई लोगों पर गाज भी गिरने वाला है।
अल्फा इंटरनेशनल मॉडल स्कूल और अल्फा नेशनल स्कूल अंग्रेजी माध्यम, यह दोनो स्कूल खैरागढ़ के दाऊचौरा में संचालित हो रहा है, ऐसा कुछ लोगों का कहना है, लेकिन किस गली में किस कोने में इतना बड़ा स्कूल खड़ा हुआ है यह अभी देखने में नजर नहीं आ रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग से मान्यता और यूडाईस कोर्ड जरूर जारी कर दिया गया है और बताया जा रहा है कि इसमें 100 से अधिक बच्चे कक्षा प्री-नर्सरी से लेकर कक्षा आठवीं तक पढ़ भी रहे हैै, क्योंकि सरकार द्वारा दी जा रही निःशुल्क किताबें तो विगत कुछ वर्षो से स्कूल के नाम से जारी किया जा रहा है और गरीब बच्चों को भी आरटीई कानून के अंतर्गत प्रवेश दिया जा रहा है, ऐसा दावा किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन ने कलेक्टर, पुलिस अधिक्षक और एसडीएम से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक शिकायत किया है और अब जांच के आदेश दिए गए है और जिन लोगों ने इन स्कूलों को मान्यता दिलाने और सरकारी किताबें दिलाने में अपना सहयोग दिया, उनकी तो मानो रातो की नींद गुम हो गई हो गई होगी, क्योंकि जांच में दोनो स्कूलों को दिखाना पड़ेगा और किताबों का हिसाब भी देना होगा, लेकिन दोनों स्कूल है कहां?
