कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को रुपये-पैसे से लेकर हथियारों और गोला-बारूद तक की मदद दी जा रही है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर भारत ने यूएनओ के पटल पर भी यह बात कही है। अब नक्सली भी कुछ इसी पैटर्न पर आगे बढ़ना चाह रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 सितंबर को नई दिल्ली में नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक ली थी। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, गृह मंत्रालय के सुरक्षा सलाहकार, आईबी चीफ और कई राज्यों के पुलिस महानिदेशक भी शामिल थे। इस बैठक को लेकर सीपीआई (एम) के सेंट्रल रीजनल ब्यूरो द्वारा दो अक्तूबर को एक बयान जारी किया गया। इसमें लिखा है कि वे अमित शाह और अजीत डोभाल का प्लान जानते हैं। वे दोनों नक्सलियों के खिलाफ कौन सा ऑपरेशन शुरू करने वाले हैं, यह भी मालूम है। पत्र में आखिर में सेंट्रल रीजनल ब्यूरो ने लिखा है, हम विदेश में रहने वाले इस मुहिम के समर्थकों से मदद की अपील करते हैं। वे ‘इंडियन पीपल वॉर’ को मजबूती देने के लिए आगे आएं।
नक्सलियों ने लिखा है, उन्हें मालूम है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बैठक में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, गृह सचिव अजय भल्ला भी मौजूद थे। गृह मंत्री ने अप्रत्यक्ष तरीके से नक्सलियों को एक साल के भीतर खत्म करने का निर्देश दिया है। इसके लिए जो प्लान तैयार किया गया है, वह तय समय सीमा में खत्म हो जाए, यह बात भी कही गई है। इतना ही नहीं, नक्सली यह बात भी जानते हैं कि अमित शाह ने सुरक्षा बलों को भारी धन राशि और अतिरिक्त फोर्स मुहैया कराने का वादा किया है। शाह की इस रणनीति का जवाब देने के लिए सेंट्रल रीजनल ब्यूरो ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में अपनी इकाइयों को सतर्क कर दिया है।
