कैट 20 फीसदी उद्योग और व्यापार भी बंद होने के कगार पर
कान्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने आज कहा कि जब से 24 मार्च को देश में लॉकडाउन लागू किया गया था तब से लेकर 30 अप्रैल तक भारतीय खुदरा व्यापार में लगभग 5.50 लाख करोड़ रुपये का व्यापार नहीं हुआ और छत्तीसगढ़ में 5 मई तक की स्थिति में लगभग 33 हजार करोड़ रुपए का व्यापार प्रभावित हुआ है। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी के नेत्रत्व में प्रदेश उपाध्यक्ष पवन बड़जात्या, प्रदेश एमएसएम्ई मोहम्मद अली हिरानी, प्रदेश मिडिया प्रभारी संजय चौबे, इकाई अध्यक्ष प्रहलाद रुंगटा, अमर कोटवानी ने बताया कि भारतीय रिटेलर्स लगभग 15,000 से 20000 करोड़ का दैनिक कारोबार करते हैं और देश में 40 दिनों से अधिक समय से तालाबंदी चल रही है, इसका मतलब है कि 5.50 लाख करोड़ से अधिक का भारी नुकसान हुआ है जो कि भारत के 7 करोड़ व्यापारियों द्वारा किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि इन 7 करोड़ व्यापारियों में से लगभग 1.5 करोड़ व्यापारियों द्वारा कुछ महीनों में ही अपने व्यापार को स्थायी रूप से बंद करना होगा और लगभग 75 लाख व्यापारी जो इन 1.5 करोड़ व्यापारियों पर निर्भर हैं उन्हें भी अपना व्यापार बंद करने पर मजबूर होना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ प्रदेश में रोजाना 700 से 800 करोड़ का व्यापार होता है, जिसमें 60 हजार व्यापारियों के जरिए 20 लाख लोगों को रोजगार मिलता है, वहीं राज्य सरकार को बड़ी मात्रा में राज्य जीएसटी की भी प्राप्ति होती है। 42 दिनों में प्रदेश में 33 हजार करोड़ का व्यापार प्रभावित हुआ। व्यापार बंद होने से सरकार को औसत 12 फीसदी जीएसटी के अनुमान से लगभग 4000 करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान राज्य सरकार को उठाना पड़ा है। व्यापार न होने से कम से कम 24 फीसदी व्यापारियों और उन व्यापारियों पर निर्भर लगभग 10 अन्य व्यापारियों द्वारा अपना व्यापार बंद होने की संभावना है।
लॉक डाउन ने भारतीय खुदरा विक्रेताओं के अगले कुछ महीनों के कारोबार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और उसी के कारण कैट ने आज प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन से आग्रह किया है की सरकार देश व प्रदेश के व्यापारिक समुदाय को संभालने और व्यापारियों को उनके अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पैकेज दे, जिससे देश के व्यापार को इस कठिन समय से उबारा जा सके। कैट के पवन बड़जात्या एवं हिरानी ने कहा कि करोना ने भारतीय खुदरा व्यापार में बहुत बड़ी अपूरणीय सेंध लगाई है जिसका पूरे देश देश की अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।
कैट के प्रदेश मिडिया प्रभारी संजय चौबे ने कहा कि भारत में कम से कम 2.5 करोड़ व्यापारी बेहद सूक्ष्म और छोटे हैं जिनके पास इस गंभीर आर्थिक तबाही से बचने का कोई रास्ता नहीं है। उनके पास ऐसे परिदृश्य में अपने व्यापार के संचालन हेतु पर्याप्त पूंजी नहीं है एक तरफ उन्हें वेतन, किराया, अन्य मासिक खर्चों का भुगतान करना पड़ रहा है और दूसरी ओर उन्हें उपभोक्ताओं की डिस्पोजेबल आय में तेज गिरावट के साथ-साथ सख्त सामाजिक दूरता मानदंडों के साथ व्यवहार करना होगा जो व्यापार को सामान्य स्थिति में नहीं आने देंगे और ऐसा कम से कम आगामी 6-9 महीने तक चलेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रही थी और पूरे क्षेत्र में मांग में भारी गिरावट आई थी, लेकिन इस घातक बीमारी ने भारत के रीटेल व्यापार को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
संजय चौबे ने व्यापारियों की दुर्दशा पर संग्यंत्मक न लेने के लिए केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों पर गहरी निराशा व्यक्त की और कहा की इससे भारत का रीटेल व्यापार प्राकृतिक मौत मार जाएगा । यह काफी भयावह है कि सरकारों ने गैर-कॉर्पोरेट क्षेत्र को नहीं संभाला है जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 45 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है और राष्ट्र के कुल कार्यबल का लगभग एक तिहाई है। इसके बजाय सरकार ने आदेश दिया है कि सभी व्यवसायों को अपने कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करना होगा, बैंक ब्याज वसूलते रहेंगे और मकान मालिक किराया मांगते रहेंगे। यह पूरी तरह से एकतरफा है जहां सरकार केवल व्यापारियों से उम्मीद करती है लेकिन आज तक व्यापारियों के व्यापार की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया जिसके कारण देश भर के व्यापारी बेहद हताश और निराश हैं।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने भी कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा विभिन्न अधिसूचनाओं का जमीनी स्तर पर ठीक तरह से पालन नहीं हुआ है। दिशानिर्देशों को लागू करने में राज्यों ने कोताही बरती है । जिला स्तर पर राज्य सरकारें और अधिकारी अपनी-अपनी धुन गा रहे हैं। दिशानिर्देशों में इस अस्पष्टता के कारण भारतीय खुदरा विक्रेताओं के संकट को और बढ़ा दिया है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय खुदरा क्षेत्र वस्तुतरू वेंटीलेटर पर है और सरकार के तत्काल हस्तक्षेप के बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र को अभूतपूर्व नुकसान होगा और आर्थिक महामारी कोरोना महामारी से भी बड़ी होगी
