चिटफंड कंपनियों में डूबी रकम वापसी के लिए निवेशकों की ओर से आवेदन जमा कर दिया गया है। जिले में हजारों की संख्या में आवेदन आएं हैं। इन आवेदनों को एकत्रित कर डाटा तैयार करने का काम अफसरों ने शुरू कर दिया है। ब्लॉक व पंचायत स्तर से आवेदनों की पूरी जानकारी मंगाई जा रही है। सूची तैयार करने के बाद कंपनियाें का डिटेल निकाला जाएगा।
अफसर पता लगाएंगे कि किस कंपनी ने किस जगह पर राशि निवेश की है पर इसमें लंबा समय लगेगा, क्योंकि कई कंपनियों की ओर से निवेशकों को दिए गए दस्तावेजों में भी गड़बड़ी है। कुछ दस्तावेजों में पता ही सही नहीं दिया गया है। वहीं जिस स्कीम के तहत राशि ली जा रही है, ऐसी स्कीम शासन स्तर पर पंजीकृत भी नहीं है। इसलिए अफसरों को कंपनियों का पता और ठिकाना जानने भी मशक्कत करनी पड़ेगी। जिले के हर ब्लॉक में बड़ी संख्या में आवेदन जमा हुए हैं। राजस्व की टीम को आवेदन लेने और डाटा इंट्री करने के काम पर लगाया है। अपर कलेक्टर सीएल मारकंडे ने बताया कि ब्लॉक स्तर से डेटा मंगाए हैं। इसके बाद ही पता चल पाएगा कि कितने निवेशकों ने किन-किन कंपनियों में कितनी राशि निवेश की और कंपनियों की चल-अचल संपत्तियां कहां-कहां पर हैं।
