अफगानिस्तान में फंसे भारतीय नागरिकों को देश वापस लाने का अभियान जारी है। इस युद्धग्रस्त क्षेत्र से निकालकर कुछ भारतीय नागरिकों को कतर के दोहा में भेजा गया था। कतर में भारतीय दूतावास ने रविवार को जानकारी दी कि ऐसे नागरिकों के दूसरे जत्थे को भारत भेजने की तैयारी की जा रही है। इस जत्थे में 146 लोग शामिल हैं। बता दें कि पहले जत्थे में 135 भारतीय नागरिक वापस लाए गए।

बीते सात दिन में 20 की मौत
वहीं, अफगानिस्तान में तालिबान की हुकुमत के बाद से लगातार स्थितियां नियंत्रण के बाहर होती जा रही हैं। बड़ी संख्या में लोग देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे हैं। काबुल एयरपोर्ट पर हालात बहुत ज्यादा खराब हैं। एक नाटो अधिकारी के मुताबिक पिछले सात दिन में यहां पर कम से कम 20 लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने बताया कि काबुल हवाई अड्डे के बाहर जो हालात पैदा हुआ है वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारी कोशिश है कि सभी विदेशी नागरिकों को जल्द से जल्द यहां से निकाला जाए।

तालिबान ने अमेरिका को बताया जिम्मेदार
इस बीच तालिबान ने अफगानिस्तान के मौजूदा हालात के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया है। उसका कहना है कि तमाम ताकत और सुविधाओं के बावजूद अमेरिकी सेना हवाई अड्डे पर व्यवस्था बनाकर रखने में नाकाम रही है। आमिर खान मुताकी नाम के तालिबानी अधिकारी ने कहा कि पूरे देश में शांति है, केवल एयरपोर्ट पर ही अफरा-तफरी मची हुई है। इससे पहले रविवार को दिन में ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि एयरपोर्ट पर भगदड़ मचने की वजह से कम से कम सात अफगान लोग मारे गए हैं।
काबुल से 329 भारतीयों को वापस लाए
रविवार को तीन विमानों से 392 लोग भारत लौटे, इनमें 329 भारतीय और दो अफगान लॉमेकर भी शामिल हैं। वायुसेना के सी-17 एयरक्राफ्ट से 168 लोगों की वापसी हुई, इनमें 107 भारतीय और 23 अफगानी सिख और हिंदू शामिल हैं। ये विमान गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस पर पहुंचा। इससे पहले एयर इंडिया के विमान से 87 भारतीयों और 2 नेपाल के नागरिकों को भारत लाया गया था। वहीं एक दूसरे विमान से 135 लोगों की वापसी हुई है।
