छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में बारिश नहीं होने से खेतों में पानी की भारी कमी होती जा रही है। खेतों में दरारें आनी शुरु हो गई है। वहीं जलाशय भी इस बार भर नहीं पा रहे है। पिछले दस साल की तुलना में इस बार जिले में अब तक औसत 65 मिमी कम बारिश हुई है। जिसका सीधा असर अगर किसी को पड़ रहा है तो वे किसान है।
इस बार जलाशय भी अभी तक प्यासे
जिले में इस बार बियासी का काम भी करीब 65 फीसदी तक पिछड़ गया है, जलाशयों में पिछले साल की अपेक्षा में करीब 45 फीसदी पानी का भराव कम है। हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में किसान फसल को बचाने के लिए जलाशयों से पानी की मांग को लेकर जिला प्रशासन के पास जा सकते है। जलाशयों में पानी की कमी है, अगर वर्तमान में स्थिति को देखे तो पानी का भराव बहुत ही कम हुआ है।

तांदुला जलाशय अब भी खाली है।
बारिश की वजह से बियासी पर पड़ा असर
मौसम की बेरुखी के कारण 9300 से अधिक हेक्टेयर में बियासी प्रभावित हुई है। जिले में कुल 1 लाख 37 हजार हेक्टेयर के करीब धान की फसल ली गई है। जिसमें 9300 से अधिक क्षेत्र बियासी का काम पानी नहीं मिलने की वजह से प्रभावित हुआ है।
जिले में बारिश का रिकार्ड पिछड़ा
एक जून मानसून से अब तक 558 मिमी औसत बारिश हुई है। दस साल पहले इस समय तक 6234.3 मिमी बारिश हो चुकी थी। इस तरह औसत बारिश 65 फीसदी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग ने जिले में इस साल 1123.7 मिमी बारिश होने का अनुमान लगाया है। इस हिसाब से देखा जाए तो अभी तक आधी बारिश भी नहीं हो पाई है। किसानों ने बताया कि अगर सप्ताहभर के अंदर बारिश नहीं होती है तो फसल चौपट हो जाएंगी। जिले में केवल 25 फीसदी किसानों के पास ही सिंचाई के साधन उपलब्ध है। ऐसे में असिंचित फसलों को लेकर संकट के बादल दिख रहे है।
जानकारी के मुताबिक, जिले के 64 हजार से अधिक किसानों ने खाद और नगदी के रुप में जिला सहकारी बैंक से 2 अरब 34 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज लिया है। वहीं जिला सहकारी बैंक के द्वारा जिले में 3 अरब 80 करोड़ रुपए खरीफ सीजन में किसानों को कर्ज बांटने का टारगेट रखा है। लेकिन सब कुछ अच्छी बारिश पर ही टिका है, अगर मानसून की इसी तरह से बेरुखी बनी रहेगी तो आने वाले समय में किसानों के सामने संकट खड़ा हो सकता है।
