साउथ अफ्रीका में जंगली जानवरों को काबू करने वाले इंजेक्शन का अब छत्तीसगढ़ के हाथियों पर उपयोग किया जाएगा। इटारफिन ड्रग नाम का यह इंजेक्शन इतना पाॅवरफुल है कि सिर्फ 5 एमएल के डोज से 5 हजार किलो का हाथी जहां खड़ा है, वहीं 3 मिनट में जड़ हो जाएगा और कुछ घंटे तक वहीं खड़ा रहेगा, गिरेगा या हिलेगा नहीं।
दरअसल हाथियों को ट्रैंक्विलाइजर गन से बेहोश करने के बाद भी वजन की वजह से उसके गले में काॅलर आईडी पहनाने में वन विभाग के पसीने छूट रहे हैं। यह नहीं हो पा रहा है, इसलिए पता नहीं चल पा रहा है कि हाथियों के झुंड कहां हैं? इस वजह से कोई भी झुंड अचानक गांवों में पहुंचकर तबाही मचा रहा है। राज्य शासन ने 9 लाख के इस इटारफिन इंजेक्शन की खरीदी की अनुमति दे दी है। केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद ड्रग कंट्रोल ऑफ इंडिया और नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो से लाइसेंस का आवेदन कर दिया गया है।
नशीला और प्रतिबंधित ड्रग होने के कारण इसके लिए लाइसेंस की जरूरत है। इसे स्टोर रखने के लिए भी लाइसेंस जरूरी है। जंगल सफारी की प्रभारी एमडी और डीएफओ मर्सीबेला के अनुसार नशीले ड्रग का उपयोग हाथियों के अलावा असम से वनभैंस लाने के लिए भी किया जाएगा। असम से कुछ माह पहले दो वनभैंस बारनवापारा अभयारण लाए गए हैं। चार वनभैंस अभी लाने का प्लान है। चारों वनभैंस को साउथ अफ्रीका वाली दवा से बेसुध कर काबू में किया जाएगा, क्योंकि उन्हें जंगल में पकड़ना और फिर असम से यहां लेकर आना भी काफी मुश्किल काम है।
जमीन पर बेहोश पड़े हाथी के गले में कॉलर आईडी पहनाना मुश्किल छत्तीसगढ़ में अब तक केवल एक हाथी के गले में कॉलर आईडी पहनायी जा सकी है। इसके लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। ट्रैंक्युलाइज गन से हाथी को बेहोश तो कर दिया गया था, लेकिन जमीन पर पड़े हाथी के गले में कॉलर आईडी पहनाने में कई तरह के प्रयास करने पड़े।
हाथी की मुंडी और गर्दन का वजन इतना ज्यादा रहता है कि कई लोग मिलकर भी उसे इतना नही उठा पा रहे थे कि कॉलर आईडी का वायर उसमें डाला जा सके। नए इंजेक्शन से हाथी बेहोश होकर गिरेगा नहीं, बेसुध होकर खड़ा रहेगा। वह कोई एक्टिविटी नहीं करेगा। उसी दौरान आसानी से उसके गले में कॉलर आईडी पहनायी जा सकेगी।
काॅलर आईडी से मिलेगी लोकेशन
छत्तीसगढ़ में हाथियों के करीब 12 दल हैं। इन दलाें का लोकेशन जानने के लिए वन विभाग को खासी मशक्कत करनी पड़ती है। हाथियों के 12 दलों में 9 दलों का मूवमेंट ज्यादातर सरगुजा संभाग में रहता है, जबकि महासमुंद में एक दल ने डेरा डाला है। हाथियों के दो दल पिछले दो-तीन महीने से गरियाबंद, धमतरी, कांकेर होते हुए भानूप्रतापपुर पहुंच गए हैं।
हर दल के मूवमेंट का पता लगाने दल प्रमुख के गले में कॉलर आईडी पहनाई जाएगी। गले में कॉलर आईडी होने से वे जहां और जिस दिशा में जाएंगे वन विभाग के कंट्रोल रूम में उनका लोकेशन नजर आएगा। हाथी जिस गांव की ओर आगे बढ़ेंगे, वहां रहने वालों को अलर्ट कर जन हानि को रोका जाएगा।
उधार लेकर दवा का किया ट्रायल
अफसरों के अनुसार अफ्रीका से जिस दवा को मंगवाने की योजना है, उसका ट्रायल किया जा चुका है। पशु चिकित्सक डा. राकेश वर्मा के अनुसार वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से 5 एमएल दवा को उधार लेकर दवा का ट्रायल हाथी और वनभैंस पर किया जा चुका है। ट्रायल सफल होने के बाद ही इसे खरीदने का प्लान बनाया गया। इस दवा का उपयोग केवल शाकाहारी वन्य प्राणियों पर ही किया जा सकता है। वन्य प्राणी जैसे बाघ, सिंह, सियार, भेड़िया आदि पर दवा का उपयोग बैन है।
वनभैंस इसलिए लाने का प्लान
छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वनभैंस की नस्ल के वजूद पर खतरा मंडरा रहा है। सुरक्षित बाड़े में ब्रीडिंग कराने के अलावा वनभैंस का क्लोन बनाने जैसे नस्ल बढ़ाने सारे फार्मूले फेल होने के बाद अब असम के जंगलों से मादा वनभैंस मंगवाने का प्लान बनाया गया। वहां के जंगलों में वनभैंस बड़ी संख्या में हैं। वहां से वनभैंस लाकर बार नवापारा में बाड़े रखकर उनकी नस्ल बढ़ाकर यहां के जंगलों में छोड़ने की योजना है।
