लॉकडाउन में अन्य प्रदेशों में फंसे श्रमिको को अपने गृह जिलों में वापस लाने के पहल के क्रम में केंद्र एवं राज्य सरकार के द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत वापस आने वाले श्रमिकों एवं व्यक्तियों को सीधे घर नहीं जाने दिया जाएगा बल्कि उन्हें 14 दिन तक क्वारेंटाइन सेंटर में रहना होगा। कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर ने जिले के नगरीय निकाय के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों तथा जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को नगरीय क्षेत्रों तथा सभी ग्राम पंचायतों में क्वारेंटाइन सेंटर तैयार करने निर्देशित किया है। इसके साथ ही क्वारेंटाइन सेंटर की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर सेंटर में तमाम व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने कहा है।
कलेक्टर ने कहा है कि बाहर से लाने वाले श्रमिकों को क्वारेंटाइन करने तथा क्वारेंटाइन सेन्टर बनाने को गंभीरता से लेते हुए प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक भवन चिन्हांकित करें। यह पंचायत भवन अथवा छात्रावास भवन भी हो सकता है। क्वारेंटाइन सेन्टर में कम से कम चार बेड़, भोजन व्यवस्था, पेयजल, साफ-सफाई एवं अन्य व्यवस्था उपलब्ध हो। क्वारेंटाइन सेन्टर में सभी व्यवस्थाओं के साथ ही कोविड़-19 के नियंत्रण एवं बचाव हेतु आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय जैसे सेनेटाईजर, मास्क का उपयोग एवं फिजिकल डिस्टेंस के मानक का विशेष ध्यान रखें। अन्य राज्य या जिले से आने वाले व्यक्तियों की पूरी जानकारी हेतु पंजी संधारित करें। पंजी में व्यक्ति के आने के स्थान,तिथि तथा क्वारेंटाइन में रहने की तिथि का स्पष्ट उल्लेख हो। क्वारेंटाइन सेन्टर में रहने वाले व्यक्तियों को किसी भी प्रकार के संक्रमण या लक्षण जैसे सर्दी, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, बुखार इत्यादि दिखाई देने पर ततकाल इसकी अनुविभागीय दण्डाधिकारी को सूचित करें ताकि रैपिड किट से शीघ्र जांच किया जा सके।
