CG : शहीद वीर नारायणसिंग श्रम अन्न योजना में अनियमितता …
रायपुर। श्रम विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिनांक 05 मार्च 2026 को जारी “Shaheed Veer Narayan Singh Shram Anna Yojana” के लिए जारी निविदा (RFP) में कई गंभीर अनियमितताएं एवं संरचनात्मक कमियां मिली है, जो निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता एवं वित्तीय अनुशासन के मूल सिद्धांतों के विपरीत हैं। इसकी शिकायत विभागिय तथा मुख्य सचिव कर जांच की मांग की गई है।
शिकायत में कहा गया है कि विभाग द्वारा जारी निविदा में दोनों क्लस्टर के लिए एकल निविदा (Bundling of Contracts)- अलग-अलग क्लस्टरों को एक साथ जोड़कर एकल बोली अनिवार्य करना “Artificial Bundling” का उदाहरण है, जिससे छोटे/क्षेत्रीय प्रतिभागियों को बाहर किया गया है और बड़े खिलाड़ियों को लाभ पहुंचाया गया है। इसी तरह Scope और Payment Structure में अस्पष्टता- Vendor को पूरा infrastructure (construction + operation) वहन करना है लेकिन भुगतान केवल “per meal” के आधार पर है यह व्यवस्था वित्तीय दृष्टि से असंतुलित एवं अस्पष्ट है, जिससे भविष्य में विवाद एवं अनियमितता की संभावना है।
जबकि Quality से अधिक Price को महत्व देना (QCBS 30:70)- इस योजना का मूल उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण भोजन प्रदान करना है, किन्तु वित्तीय प्रस्ताव को 70% वेटेज देना “Quality Compromise” को बढ़ावा देता है। वहीं अनुभव की शर्तों के माध्यम से चयन को सीमित करना- 50% प्रोजेक्ट वैल्यू के बराबर अनुभव की शर्त केवल कुछ चुनिंदा कंपनियों को ही पात्र बनाती है, जिससे प्रतिस्पर्धा समाप्त होती है। इसके अलावा अत्यधिक विवेकाधिकार (Excessive Discretion)- विभाग को क्लस्टर आवंटन, L1/L2 चयन एवं अन्य निर्णयों में अत्यधिक विवेकाधिकार दिया गया है, जो पारदर्शिता के सिद्धांत के विपरीत है और पक्षपात की संभावना उत्पन्न करता है। निविदा समयसीमा अत्यंत सीमित है इतने बड़े एवं जटिल प्रोजेक्ट के लिए अत्यंत कम समय दिया जाना दर्शाता है कि प्रक्रिया पूर्व-नियोजित हो सकती है। निविदा में Contradictory Provisions (Consortium vs Sub-contracting)- एक ओर consortium की अनुमति है, जबकि sub-contracting पूर्णतः प्रतिबंधित है, जो व्यवहारिक रूप से विरोधाभासी एवं भ्रमपूर्ण प्रावधान है। टेंडर प्रक्रिया के बाद SHG को शामिल करने का विकल्प देना प्रक्रिया की पारदर्शिता को कमजोर करता है एवं चयन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि निविदा प्रक्रिया के संबंध में गंभीर अनियमितताओं एवं पारदर्शिता की कमी के संकेत प्राप्त हो रहे हैं। यह संदेह व्यक्त किया जाता है कि राज्य के बाहर की कुछ कंपनियों, जैसे कि Foodsutra Art of Spices Pvt. Limited, Het Chint Hospital Pvt. Limited, Shree Sai Services Pvt. Limited, Pramookh तथा SLP Hospital Incorporation को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निविदा के टर्नओवर, अनुभव एवं अन्य तकनीकी मापदंड इस प्रकार निर्धारित किए गए हैं, जिससे वे विशेष रूप से पात्र ठहर सकें।उक्त प्रक्रिया के परिणामस्वरूप यह भी ज्ञात हुआ है कि इन कंपनियों को मूल्यांकन में 100 में से 95 से 100 अंक प्राप्त हुए हैं, जो कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा एवं पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होता है।
जारी निविदा में छ.ग. भण्डार क्रय नियम 2002 और जेम के नियमावली 2017 का पूर्णत: अनुपालन करते हुए नियमविरूद्ध निविदा की शर्तो में अनुचित प्रावधान निविदा समिति और विभाग के आला अधिकारी के निर्देश पर हुआ है। शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना के क्रियान्वयन हेतु श्रम विभाग द्वारा अधिसूचना क्रमांक एफ 3-1/2017/16 दिनांक 17.01.2018 जारी की गई है। उक्त अधिसूचना के बिंदु क्रमांक ‘फ’ के अनुसार श्रमिकों को ₹5 में 200 ग्राम पका हुआ चावल, 50 ग्राम दाल, 50 ग्राम सब्जी एवं 10 ग्राम अचार प्रदान करने का स्पष्ट प्रावधान है। विभाग द्वारा जारी की गई निविदा (टेंडर) की शर्तों में उक्त अधिसूचना के प्रावधानों की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से परिवर्तन किया गया है।
निविदा की शर्तें योजना के मूल नियमों के विपरीत हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि किसी विशेष कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कृत्य न केवल शासन की अधिसूचना का उल्लंघन है, बल्कि वित्तीय नियमों एवं पारदर्शिता के सिद्धांतों के भी प्रतिकूल है। अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि उक्त निविदा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए।अधिसूचना के अनुरूप ही निविदा शर्तों को सुनिश्चित किया जाए। दोषी निविदा समिति जो बिना प्रावधान निविदा शर्तों तैयार किये है उनके अधिकारियों/ कर्मचारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही की जाए।
शिकायतकर्ता ने इन अनियमितताओं को देखते हुए मुख्य सचिव से मांग की है कि उक्त निविदा की उच्च स्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। सभी Restrictive एवं अस्पष्ट शर्तों को निरस्त कर पुनः निविदा जारी की जाए। स्थानीय संस्थाओं, SHG एवं MSME को भागीदारी का अवसर दिया जाए। पूरी प्रक्रिया को GFR 2017 के अनुरूप पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक बनाया जाए। इस संबंध में श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर का कहना है कि उन्हें शिकायत प्राप्त हुई है जिसका अध्ययन कर अनियमितताओं की जांच कराई जाएगी।
