CG : सुशासन की सरकार प्रदेश में : रेत संकट में आई कमी, खदानों के संचालन में पारदर्शिता …
रायपुर। साय सरकार ने रेत खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, संगठित, पर्यावरण-संवेदनशील और जनहितैषी बनाने के उद्देश्य से व्यापक कदम उठाए हैं। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान राज्य में संचालित रेत खदानों की संख्या 300 से घटकर लगभग 100-150 रह गई थी, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हुए और अवैध खनन को बढ़ावा मिला। इस स्थिति से निपटने के लिए वर्तमान सरकार द्वारा खनिज नीति में सुधार कर रेत खनन की व्यवस्था को संगठित, नियंत्रित और जनहितकारी बनाया गया है।
वर्तमान में 200 रेत खदानें पर्यावरणीय स्वीकृति के साथ विधिवत संचालित हैं, जबकि अन्य खदानों की मंजूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सरकार की योजना अगले डेढ़ साल तक 300 से अधिक नई खदानों को स्वीकृति देने की है। इससे रेत की आपूर्ति सुलभ बनी रहेगी और राज्य में निर्माण गतिविधियों को और गति मिलेगी।
जिला और राज्य स्तरीय टास्क फोर्स द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है, जिसमें खनिज, राजस्व, पुलिस, परिवहन और पर्यावरण विभाग के अधिकारी शामिल हैं। वहीं, राजनांदगांव और बलरामपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों में रेत से संबंधित विवादों एवं घटनाओं पर भी त्वरित कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में विगत दिनों 16 अप्रैल को हुई कैबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम 2025 और छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 में संशोधन किया गया है। इसमें खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन व भंडारण पर कड़े दंड का प्रावधान है। इसमें 25 हजार से 5 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम 2025 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। अब केंद्र अथवा राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम जैसे छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पाेरेशन लिमिटेड को रेत खदानें आरक्षित की जा सकेंगी।
इससे रेत के संकट में कमी आएगी। साथ ही रेत आसानी से मिलेगी। इसी तरह छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 में संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, नियंत्रण और राजस्व वृद्धि करना है। साथ ही अवैध खनन को रोकना तथा प्रक्रिया का सरलीकरण करना है। गौण खनिज की ऐसी खदानें जो अकारण बंद रहती हैं अथवा शिथिल रहती है, उनमें अनिवार्य भाटक दर में 30 वर्षाें के बाद वृद्धि की गई है। अवैध परिवहन के मामलों में सुपुर्दगी दिए जाने के लिए जमानत राशि का भी निर्धारण किया गया है।
