रायपुर। राजधानी के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में देर रात ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई में तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया। क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर आरोपियों को उस समय पकड़ा, जब वे मोबाइल के जरिए ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे थे। पुलिस ने मौके से मोबाइल फोन, सट्टा से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सामग्री जब्त की है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हर्षित मोटवानी, लकी पाहुजा और हनी गंगवानी के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये तीनों युवक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टा खिलाने का काम कर रहे थे और इसके लिए अलग-अलग मोबाइल नंबर और एप्लीकेशन का उपयोग किया जा रहा था। आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। क्राइम ब्रांच की टीम ने बताया कि उन्हें लंबे समय से इस इलाके में ऑनलाइन सट्टे के संचालन की सूचना मिल रही थी। इसी आधार पर निगरानी रखी जा रही थी और पुख्ता सूचना मिलने के बाद देर रात कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि राजेंद्र नगर थाने से जुड़े एक पुलिसकर्मी पर पहले आरोपियों के साथ लेन-देन की बात सामने आई थी। बताया जा रहा है कि कथित रूप से लाखों रुपये में सौदेबाजी की कोशिश हुई, लेकिन मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचने की आशंका के चलते बाद में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस विभाग की ओर से नहीं की गई है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि ऑनलाइन सट्टे के इस नेटवर्क में कई ऐसे लोग शामिल हैं, जो नियमित रूप से कथित तौर पर कुछ पुलिसकर्मियों तक पैसा पहुंचाने का काम करते हैं। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष अभी सामने नहीं आया है, लेकिन अगर ये बातें सही साबित होती हैं, तो यह कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। मौके पर पहुंची मीडिया टीम ने भी स्थिति का जायजा लिया और पाया कि इलाके में लंबे समय से ऑनलाइन सट्टे की गतिविधियां संचालित हो रही थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के अवैध कारोबार पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं होने से ऐसे गिरोहों के हौसले बढ़ते हैं। इस घटना के बाद पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन सट्टे जैसे संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है। फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है। अब देखना होगा कि जांच में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और क्या आरोपों में घिरे पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाती है या नहीं।