छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के पदाधिकारियों ने किराया बढ़ाने की मांग को लेकर बस रैली निकाली। विरोध-प्रदर्शन की यह रैली प्रदेश के हर शहर में निकाली गई। महंगाई की वजह से हुए प्रदेश स्तरीय इस आंदोलन का असर रायपुर में भी देखने को मिला। पंडरी बस स्टैंड पर गांधी टोपी लगाए बस संचालक जमा होने लगे। सभी ने हाथ में हमारी मांगे पूरी करो, महाबंद जैसी बातें लिखी तख्ती थाम रखी थी। बस स्टैंड के बाहर ही नारेबाजी शुरू हो गई। उनकी मांग थी कि जिस रफ्तार से डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं, उसी तरह बसों का किराया भी बढ़ाया जाए। महंगे डीजल में कम किराए पर बसें चलाना मुश्किल हो रहा है।
पंडरी बस स्टैंड पर दर्जनों बस मालिकों की गाड़ियां लाकर खड़ी की गईं थीं। ये सभी धीरे-धीरे कर सरकार के जिम्मेदार लोगों से मिलकर अपनी मांगों से अवगत कराने बढ़ने लगीं। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस के जवान मौजूद रहे। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि बसों की ये बारात कलेक्टोरेट परिसर तक जाएगी। लेकिन बारात लेकर 100 मीटर ही चलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने बस ऑपरेटरों का रास्ता रोक दिया। यहां से पुलिस ने किसी को आगे जाने नहीं दिया। काफी देर तक यहां गहमागहमी का माहौल रहा।

तीन बसें लेकर सड़क प्रदर्शनकारी उतरे, ट्रैफिक जाम के हालात बन गए।
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद बस ऑपरेटर परिवहन मंत्री के घर ज्ञापन देकर लौट गए। पदाधिकारियों ने इस दौरान एलान कर दिया कि यदि इनकी मांग नहीं मानी गई तो 13 जुलाई से पूरे प्रदेश में बसों का संचालन बंद कर दिया जाएगा।

पुलिस ने बस स्टैंड से कुछ दूरी पर ही रोक लिया।
इससे पहले भी सौंपा था ज्ञापन मगर नहीं बनी बात
बीते सप्ताह शुक्रवार के दिन भी बस ऑपरेटरों ने रायपुर कलेक्टर से मुलाकात की। सभी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बसों का किराया बढ़ाने को लेकर सरकार का ध्यान इस ओर करें। ज्ञापन लिखा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा लगातार डीजल के दामों में की जाने वाली बढ़ोतरी की वजह से बस संचालन करना अब मुश्किल हो रहा है। राज्य के 1 लाख 8 हजार बस संचालकों का व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हो गया है।
क्यों कर रहे किराया बढ़ाने की मांग
कलेक्टर को बस संचालकों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में कहा गया है कि अब वह भूखे मरने को मजबूर हो चुके हैं। बस संचालकों ने बताया है कि मध्य प्रदेश राज्य में साल 2018 में 10% किराया बढ़ाया गया था। उस समय छत्तीसगढ़ में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी। मई महीने में साल 2021 में मध्य प्रदेश में 25% किराया और बढ़ाया जा चुका है, लेकिन छत्तीसगढ़ में यात्री किराया बढ़ाने को लेकर कोई भी फैसला नहीं नहीं किया गया है। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने मांग की है कि प्रदेश में 40% यात्री किराया बढ़ाया जाए ताकि बसों के संचालन के लिए खर्च निकालना मुमकिन हो सके।

प्रदर्शन के दौरान बस संचालक।
इस कानून को भी खत्म करने की मांग
यातायात महासंघ के अनवर अली ने दैनिक भास्कर को बताया कि राज्य सरकार ने साल 2009 में एक ऐसा कानून भी लागू किया था, जिसमें यदि बसें खड़ी हुई हैं उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा तो भी उसका टैक्स हमें सरकार को देना पड़ता है। ऐसे में हम चाहते हैं कि इस कानून को खत्म किया जाए क्योंकि इस वजह से बड़ा नुकसान हमें झेलना पड़ता है।
मांग नहीं मानी गई तो ये होगा
- 12 जुलाई को रायपुर के बूढ़ा तालाब पर प्रदेश के सभी बस संचालक पूरे परिवार के साथ महा धरना देंगे।
- 13 जुलाई को बस संचालकों ने अनिश्चितकाल के लिए बसों की सेवा बंद करने का फैसला लिया है।
- 14 जुलाई को यह सभी बस संचालक दोपहर 3 बजे खारून नदी पर जाकर जल समाधि लेंगे।
