देश का आज डॉक्टर्स डे मनाकर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए डॉक्टरों को शुक्रिया कह रहा है। डॉक्टरों के सम्मान को समर्पित आज के दिन रायपुर में डॉक्टरों की टीम ने कमाल का काम कर दिखाया। रायपुर में डॉ. भीमराव आम्बेडकर अस्पताल की डॉक्टरों ने एक महिला के प्लेसेंटा परक्रेटा का जटिल ऑपरेशन किया।
बलौदा बाजार की एक महिला ने एक महीने पहले घर पर ही जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। प्रसव के दौरान महिला का काफी खून बहा था। इसके साथ ही गर्भनाल भी गर्भाशय से बाहर नहीं निकला था। महिला के घरवाले नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए जहां से उसे बलौदा बाजार जिला अस्पताल भेज दिया गया। जिला अस्पताल में अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति को देखते हुए महिला को खून चढ़ाया गया। बाद में उसे रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग रेफर कर दिया गया।
आम्बेडकर अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल ने बताया, मरीज जब यहां भर्ती हुई तब भी उसका रक्तस्राव जारी था। यहां यहां उसको तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। उसके बाद स्थिति में सुधार होने के बाद एमआरआई और बाकी जांचें कराई गई। एमआरआई जांच में गर्भाशय में प्लेसेंटा परक्रेटा की पुष्टि हुई। इसके बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन की तैयारी की। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. ज्योति जायसवाल, डॉ. रूचि किशोर गुप्ता, डॉ. स्मृति नाईक और डॉ. श्वेता ध्रुव शामिल रहीं।
डॉक्टरों के सामने थी गर्भाशय बचाने की चुनौती
डॉ. ज्योति जायसवाल ने बताया, महिला को अत्यधिक रक्तस्त्राव पहले ही हो चुका था। यहां आने के बाद तीन यूनिट खून चढ़ाने के बाद ऑपरेशन के दौरान भी तीन यूनिट खून का इंतजाम किया गया था। महिला की उम्र काफी कम थी और ऐसे में हमारी टीम के सामने चुनौती इस बात की थी कि गर्भाशय को बचाते हुए गर्भनाल को कैसे बाहर निकालें। ऐसे में हमारी टीम ने बेहद ही सावधानीपूर्वक ऑपरेशन करते हुए गर्भनाल को बाहर निकाल लिया और गर्भाशय को भी सुरक्षित बचा लिया।
समय पर इलाज नहीं मिलता तो जा सकती थी जान
ऑपरेशन का नेतृत्व करने वाली डॉ. ज्योति जायसवाल ने बताया, सामान्यतः गर्भनाल या प्लेसेंटा, बच्चेदानी या गर्भाशय की दीवार से हल्की सी चिपकी रहती है। जैसे ही बच्चे की डिलीवरी होती है, संकुचन के फलस्वरूप गर्भनाल भी बाहर निकल कर आ जाता है। इस केस में गर्भनाल का कुछ हिस्सा बच्चेदानी में ही धंसा हुआ था। इसकी वजह से महिला को रक्तस्राव हो रहा था। प्लेसेंटा परक्रेटा एक जानलेवा स्थिति है जिसका समय पर उपचार नहीं मिलने से मरीज की जान भी जा सकती है।
क्या है प्लेसेंटा परक्रेटा
प्लेसेंटा गर्भाशय (गर्भ) में बढ़ता है और गर्भनाल के माध्यम से बच्चे को भोजन और ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है। आमतौर पर, प्लेसेंटा गर्भाशय के ऊपरी हिस्से में बढ़ता है और बच्चे के जन्म तक वहीं रहता है। प्रसव के अंतिम चरण के दौरान, प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाता है, और संकुचन की प्रक्रिया से शिशु जन्म के कुछ ही मिनटों में बाहर आ जाता है। कभी-कभी यह प्लेसेंटा खुद को गर्भाशय की दीवार से बहुत गहराई से जोड़ लेता है। इससे प्लेसेंटा परक्रेटा की समस्या बनती है। इस स्थिति में कभी-कभी यह मूत्राशय और उसके आस-पास के अंगों तक फैल जाता है। इन स्थितियों में, बच्चे को जन्म देने के बाद प्लेसेंटा गर्भाशय से पूरी तरह से अलग नहीं होता है। इससे खतरनाक रक्तस्राव हो सकता है।
ऐसी समस्या से बचने के लिए क्या करें
डॉक्टरों के मुताबिक, इस समस्या की जांच के लिये आमतौर पर अल्ट्रासाउंड का उपयोग किया जाता है। कुछ जटिल मामलों में एमआरआई की जरूरत पड़ती है। ये जांचें दर्द रहित होती हैं। गर्भवती महिलाओं के लिये प्लेसेंटा परक्रेटा कई बार जानलेवा स्थिति का निर्माण करती है। जब ये स्थितियां जन्म से पहले पाई जाती हैं, तो विशेषज्ञों द्वारा सिजेरियन सेक्शन (जिसे सी-सेक्शन भी कहा जाता है) के तुरंत बाद हिस्टेरेक्टॉमी की जाती है। ताकि प्लेसेंटा परक्रेटा के कारण होने वाले रक्तस्राव को जीवन के लिए खतरा बनने से रोका जा सके। ऐसी स्थिति से बचने के लिये संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दें। गर्भवती महिलायें गर्भावस्था की शुरूआती अवस्था से ही डॉक्टरों से अपनी जांच कराएं।
