राजनांदगांव , दिग्विजय कॉलेज में पीएम उषा सेल द्वारा पुस्तक लेखन वर्कशॉप, आइडिया टू पब्लिकेशन विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला रूसा 2.0 के सहयोग से की गई। स्नातक, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि एमडी कावरे आईएएस आयुक्त रायपुर संभाग के स्वागत से शुभारंभ हुआ। प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने कहा वर्तमान में ज्ञान के प्रसार और शोध कार्यों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने पुस्तक लेखन महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। विद्यार्थियों और शोधार्थियों को प्रेरित किया।
उन्होंने कहा ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके विचारों, शोध परिणामों और अनुभवों को व्यवस्थित रूप से पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। ऐसी कार्यशाला विद्यार्थियों में लेखन कौशल, अनुसंधान दृष्टि,अकादमिक ईमानदारी को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मुख्य अतिथि एमडी कावरे ने कहा वर्तमान समय में ज्ञान और सूचना का युग है, जहां विचारों का सही दस्तावेजी करण और प्रकाशन आवश्यक है। पुस्तक लेखन रचनात्मक गतिविधि नहीं समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का स्थायी स्रोत भी है। नियमित रूप से पढ़ने की आदत डालें, अच्छा लेखक बनने अच्छा पाठक होना जरूरी है। पीएन राव, डॉ. माजिद अली, डॉ. संजय ठिसके, डॉ. त्रिलोक कुमार,चिरंजीव पाण्डेय, मंजूषा बाजपेयी सहित अन्य मौजूद रहे।
केवल पाठक नहीं लेखक बनने का प्रयास करें युवा: एमडी कावरे ने कहा युवा केवल पाठक बनकर नहीं रहें बल्कि लेखक बनने का प्रयास करें।
विज्ञान व समाज में संवाद बनाए रखने लेखन जरूरी विश्वास मेश्राम नोडल अधिकारी एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ विज्ञान ने कहा विज्ञान और समाज के बीच संवाद स्थापित करने में लेखन की अहम भूमिका है। वैज्ञानिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना जरूरी है ताकि सामान्य जन विज्ञान को समझ सके। भारत में विज्ञान लेखन की परंपरा विकसित हो रही है। इसमें युवाओं की भूमिका अहम है। विज्ञान लेखन वैज्ञानिकों के लिए नहीं समाज के हर नागरिक के लिए जरूरी है। वैज्ञानिक घटनाओं, पर्यावरणीय समस्याओं और सामाजिक मुद्दों पर लेख लिखें। विज्ञान को सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए।
