बेमेतरा । भारत की जनगणना 2027 के सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन के लिए देशभर में जिला स्तर पर अधिकारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ हो चुका है। इसी क्रम में आज जिलाधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम विधिवत रूप से प्रारंभ हुआ। राज्य जनगणना निदेशालय रायपुर से आई प्रशिक्षक टीम द्वारा जनगणना कार्य हेतु नियुक्त जिला स्तरीय अधिकारियों एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को विस्तृत एवं तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
राज्य मुख्यालय रायपुर से आए प्रशिक्षक सुष्मिता स्वान एवं शुभम कुशवाहा ने अधिकारियों को जनगणना की संपूर्ण प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्थाओं तथा फील्ड संचालन से संबंधित बिंदुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। प्रशिक्षण में जनगणना से जुड़े कानूनी प्रावधान, गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और कार्य की संवेदनशीलता पर विशेष बल दिया गया।
पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना 2027 :
प्रशिक्षण में बताया गया कि यह जनगणना भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। इस बार कागज आधारित पारंपरिक प्रणाली के स्थान पर आधुनिक डिजिटल टूल्स का उपयोग किया जाएगा, जिससे आंकड़ों की शुद्धता, पारदर्शिता और त्वरित संकलन सुनिश्चित किया जा सके।
दो चरणों में संपन्न होगा कार्य :
अधिकारियों को बताया गया कि जनगणना कार्य दो चरणों में सम्पन्न किया जाएगा प्रथम चरण (1 मई 2026 से 30 मई 2026 तक) : मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य। द्वितीय चरण (फरवरी-मार्च 2027) : जनसंख्या की वास्तविक गणना।
प्रशिक्षण में बताया गया कि प्रथम चरण में प्रत्येक भवन एवं आवासीय इकाई का विवरण संकलित किया जाएगा, जबकि द्वितीय चरण में प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय जानकारी दर्ज की जाएगी। जनगणना कार्य के लिए अधिकारियों को मोबाइल एप्लिकेशन, CMMS (Census Management & Monitoring System) पोर्टल तथा HLBC (Houselisting Block Creator) वेब पोर्टल के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई। इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से डेटा प्रविष्टि, निगरानी, ब्लॉक निर्माण एवं प्रगणकों की कार्यप्रणाली का संचालन किया जाएगा। इस बार जनगणना में स्व-गणना (सेल्फ ऐनुमैरेशन ) का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिसके अंतर्गत नागरिक स्वयं पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। घर-घर भ्रमण के दौरान प्रगणक द्वारा उस जानकारी का सत्यापन एवं अनुमोदन किया जाएगा। प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि इस जनगणना में जाति आधारित डेटा संग्रह को भी शामिल किए जाने की संभावना है, जिससे सामाजिक संरचना से संबंधित व्यापक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।
जनगणना कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील : कलेक्टर
कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रशिक्षण को गंभीरता एवं प्राथमिकता के साथ लें तथा सभी बिंदुओं को भली-भांति समझें। उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है और यह देश के विकास एवं अधोसंरचना विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि जनगणना राष्ट्र की आर्थिक स्थिति एवं सामाजिक संरचना से संबंधित सबसे व्यापक और प्रामाणिक डेटा स्रोत है। प्रशासनिक निर्णयों, नीति निर्धारण, विकास परियोजनाओं की रूपरेखा, लोकसभा एवं विधानसभा सीटों के परिसीमन तथा शासकीय निधियों के न्यायसंगत वितरण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कलेक्टर ने कहा कि जनगणना के आंकड़ों के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल, रोजगार एवं अन्य बुनियादी सेवाओं की प्रभावी योजना बनाई जाती है। अतः सभी अधिकारी इस कार्य को पूर्ण निष्ठा, पारदर्शिता एवं संवेदनशीलता के साथ संपादित करें। इस अवसर पर अपर कलेक्टर प्रकाश भारद्वाज, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेमलता पद्माकर, ड्यूटी कलेक्टर दीप्ति वर्मा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
