राजनांदगांव. अन्र्तराष्ट्रीय योग दिवस के अतीव महत्ता परिप्रेक्ष्य अवसर पर नगर के विचार विज्ञ प्राध्यापक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने समसामयिक चिन्तन टीप में बताया कि योग भारतीय सनातन संस्कृति की अनमोल विरासत है। विशेषकर समग्र शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से योग परम सूत्र है जिसे अखिल विश्व को हमारे महर्षियों ने भी प्रदान किया है। वर्तमान महामारी संक्रमण काल में योग के आसन, प्राणायाम और ध्यान के नियमित अभ्यास सर्वजन को सहजता से सुदृढ सुरक्षा कवच प्रदान करते है। वस्तुत: योग मानवीय उत्कर्ष का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। योग एक साथ मन और शरीर, विचार और कार्य, संयम और मानसिक आनंद के मध्य एकरूपता लाने का सरलतम आयाम है साथ ही मानव और प्रकृति के मध्य अनुकूलन को भी बढ़ावा देता है। आगे प्राध्यापक द्विवेदी ने विशेष रूप से बताया कि योग व्यक्तिगत, सामाजिक एवं आध्यात्मिक उन्नति एवं उत्थान के श्रेयष्कर मार्ग को प्रशस्त करता है। महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग सूत्र-यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा , ध्यान एवं समाधि, मानव तन-मन एवं इंद्रिय नियंत्रण की अमोघ विधियाँ जिन्हें अपना कर हम सभी अतीव कल्याणकारी पथ पर अग्रसर हो सकते हैं। वर्तमान समय में देश-धरती में जन-जन में अनियंत्रित होती चित्तवृत्ति के कारण ही महामारी, आतंकवाद, हिंसा, युद्ध, जलवायु परिवर्तन और भूण्मडलीय तापन जैसी समस्याएं बढ़ी है और इन पर प्रभावी नियंत्रण तथा निरोध योग से ही संभव है। आइये योग की महत्तम उपादेयता को मन-प्राण से स्वीकारते हुये योग के आधार अंग-प्राणायाम, आसन एवं ध्यान को अपनी दिनचर्या में सरलता से सम्मिलित करें तथा देश-धरती के उत्थान में सहभागी बनें।
