राजनांदगांव, जनसंपर्क विभाग के द्वारा नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में विगत दिनों तीन दिवसीय साहित्य उत्सव का आयोजन किया गया। इसमें लोककला और संस्कृति की महक बिखरी। जिले से बड़ी संख्या में कवि और साहित्यकारों ने शिरकत कर अपनी कविताओं के माध्यम से इंद्रधनुषी रंग बिखेर कर संस्कारधानी की कला साहित्य को जीवंत किया। साहित्य उत्सव के इस महाकुंभ में छत्तीसगढ़ी लोककला पंडवानी, भरथरी, पंथी नृत्य, सुआ नृत्य, सैला नृत्य, सरहुल, राउत नृत्य, करमा ददरिया के रंग देखने को मिले।
कार्यक्रम में शामिल होने से पहले संस्कारधानी के दिग्विजय परिसर में स्थित त्रिवेणी संग्रहालय ने देश, प्रदेश से पहुंचे साहित्य प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने इसे अपनी स्मृति में संजोने तस्वीरें ली। संस्कारधानी का त्रिवेणी संग्रहालय लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र बना रहा। साहित्य सृजन समिति के कवि और साहित्यकारों की उपस्थिति रही। कवि व साहित्यकारों ने त्रिवेणी संग्रहालय का भ्रमण किया। उन्होंने गजानन माधव मुक्तिबोध, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और बल्देव प्रसाद मिश्र की रचनाओं की समीक्षा की।
10 साल पहले भी टीम के साथ आयोजन में गए थे करीब 10 साल पहले जन संपर्क विभाग ने पुरखौती मुक्तांगन में तीन दिवसीय आयोजित कला, साहित्य महोत्सव में जिले के कवि एवं साहित्यकार आत्माराम कोशा ने अपनी टीम के साथ हिस्सा लिया था। इस बार पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव में उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति के अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा, सचिव मानसिंह, उपाध्यक्ष थंगेश्वर, रिखी पटेल, छोटेलाल सिन्हा, हर्षा देवांगन, राजेश रामटेक ने उपस्थिति दर्ज कराई। कवि छोटेलाल सिन्हा, हर्षा देवांगन ओपन ने काव्य पाठ कर लोगों का मन मोह लिया।
आयोजन के दौरान तीन दिन विविध कार्यक्रम हुए पुरखौती मुक्तांगन के साहित्यिक महोत्सव में जिले के कवि, साहित्यकार डॉ चंद्रशेखर शर्मा, ओमप्रकाश साहू, वीरेन्द्र तिवारी, महेंद्र बघेल, राज कुमार चौधरी, ने काव्य पाठ की प्रस्तुति दी। राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय






