मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से बसंतपुर की बिल्डिंग से पूरा सेटअप पेंड्री की नई बिल्डिंग में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। इस शिफ्टिंग के बाद करोड़ों की लागत से बनाई गई बिल्डिंग खंडहर में तब्दील हो जाएगी। अफसरों ने शिफ्टिंग का प्लान तो किया है पर पुरानी बिल्डिंग का क्या होगा? वहीं सिविल सर्जन के अंतर्गत कार्य करने वाले कर्मचारी कहां ड्यूटी करेंगे? इसे लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है।
इधर शहर के लोग बसंतपुर की पुरानी बिल्डिंग में सिटी हॉस्पिटल संचालित करने की मांग कर रहे हैं ताकि सामान्य बीमारी का इलाज लोकल स्तर पर हो सके और पेंड्री तक पांच किलोमीटर का सफर तय न करना पड़े। हॉस्पिटल प्रबंधन को कलेक्टर ने जल्द ही नई बिल्डिंग में शिफ्ट करने के निर्देश दिए पर प्रबंधन की ओर से शासन स्तर से बजट जारी होने का इंतजार किया जा रहा है। शिफ्ट करने के लिए लाखों रुपए का खर्च आएगा। खबर है कि प्रबंधन की ओर से लगभग 20 लाख रुपए का बजट शासन से मांगा गया है ताकि उपकरणों के साथ ही अन्य संसाधनों को पेंड्री तक ले जाया जा सके।
मैन पॉवर का है रोड़ा
हॉस्पिटल प्रबंधन पहले से ही मैन पॉवर की कमी से जूझ रहा है। इसलिए पुरानी बिल्डिंग में सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए ओपीडी खोलने पर भी रोड़ा है। इस वजह से प्रबंधन की ओर से फिलहाल इसे लेकर कोई प्लानिंग ही नहीं की गई है। अभी इसे लेकर अफसर केवल चर्चा ही कर रहे हैं, जल्द इसमें प्रगति आएगी।
नई बिल्डिंग में ऐसा सेटअप
हॉस्पिटल प्रबंधन ने प्लान किया है कि भूतल और प्रथम तल में ओपीडी संचालित करेंगे। भूतल में ही पैथोलॉजी लैब, कैजुअल्टी वार्ड और एक्स-रे रखा जाएगा। प्रथम तल में नाक, गला, टीबी के मरीजों का इलाज किया जाएगा। दूसरे तल में नेत्र रोग, मनोरोग, प्रसूति वार्ड, शिशु रोग विभाग संचालित किए जाएंगे। चौथी मंजिल में ओटी रहेगा।
अभी स्थिति स्पष्ट नहीं
मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की डीन डॉ. रेणुका गहने का कहना है कि अस्पताल को जल्द शिफ्ट करने वाले हैं। पुरानी बिल्डिंग में क्या होगा? यह स्पष्ट नहीं है पर हो सकता है कि यहां सेटेलाइट सेंटर बनाएं। एड्स, सिकलसेल की यूनिट यहां रखी जा सकती है पर इस संबंध में सीएमएचओ के साथ बैठकर प्लान करेंगे।
सिटी हॉस्पिटल के लिए करेंगे प्रयास
महापौर हेमा देशमुख का कहना है कि बिल्डिंग बेकार न हो, इसके लिए यहां पर सिटी हॉस्पिटल खोलने का प्रयास करेंगे। इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा कर मांग रखी जाएगी, क्योंकि शहर में सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए हॉस्पिटल का होना जरूरी है।
यहां 100 बेड का जिला अस्पताल पहले ही स्वीकृत
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान राजनांदगांव में 100 बेड के जिला अस्पताल की स्वीकृति दिलाई थी। इसके लिए बाकायदा बजट का प्रावधान भी किया गया था। हालांकि जिला अस्पताल अब तक अस्तित्व में नहीं आया है। औपचारिक रूप से पुराने सीएमएचओ कार्यालय में ओपीडी संचालित की जा रही थी। हालांकि अब ओपीडी बंद हो चुकी है।
एनएचएम की बिल्डिंग में करोड़ों रुपए खर्च किए हैं
मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से वर्तमान में शिशु रोग, प्रसूति वार्ड का संचालन एनएचएम की बिल्डिंग पर किया जा रहा है। यहां पर 100 बेड का मदर एंड चाइल्ड केयर हॉस्पिटल संचालित है। इस बिल्डिंग के पीछे करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। प्रसूति वार्ड और शिशु रोग विभाग शुरू करने से पहले भी लाखों रु. व्यवस्था बनाने में खर्च किए हंै। शिफ्टिंग के बाद बिल्डिंग भी वीरान हो जाएगी।
