अनुकंपा नियुक्ति में 10 प्रतिशत सीलिंग को शिथिल करने के फैसले ने बदली दिवंगत शिक्षकों के बेसहारा परिवारों की तकदीर- प्रदेश शिक्षक फेडरेशन
अनुकंपा नियुक्ति में सीधी भर्ती के लिए प्रभावशील परिवीक्षा अवधि एवं स्टाईपेंड की शर्त बंधनकारी नहीं होनी चाहिय- प्रदेश शिक्षक फेडरेशन
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों के तीव्र निराकरण गति को लोकहित में भूपेश सरकार के नीति और निर्णय का प्रतिफल बताया है। प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी एवं प्रान्तीय महामंत्री सतीश ब्यौहरे का कहना है कि दिवंगत शिक्षकों के बेसहारा परिवार को, सरकार ने सहारा दिया है। सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति में 10 प्रतिशत सीलिंग को शिथिल करने का फैसला लिया था। इसी फैसले ने दिवंगत शिक्षकों के बेसहारा परिवारों की तकदीर को बदल दिया है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के 500 से अधिक पुराने प्रकरण वर्षों से लंबित थे। वहीं कोरोना संक्रमण के कारण 411 से अधिक शिक्षक दिवंगत हुए थे और कोरोना महामारी ने शिक्षकों को सर्वाधिक निशाना बनाया था, जोकि एक गंभीर चिंता का विषय था।
फेडरेशन ने 697 दिवंगत शिक्षकों के परिवार के आश्रितों को शिक्षा विभाग के द्वारा सीमित समय में अनुकंपा नियुक्ति आदेश जारी करने पर संतोष व्यक्त किया है। फेडरेशन को कहना है कि सरकार ने दिवंगत शिक्षक के परिवार के आश्रित सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति सांत्वना स्वरूप दिया है जोकि, सीधी भर्ती (रिक्रूटमेंट) के प्रक्रियान्तर्गत नहीं होता है। अतः अनुकंपा नियुक्ति को परिवीक्षा अवधि में दिया जाना अनुचित है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्ते) नियम 1961 के नियम-7 के तहत सेवा में भर्ती के तरीकों का उल्लेख है। नियम-7 (एक) में सीधी भर्ती द्वारा, जोकि प्रतियोगी परीक्षा/चयन के माध्यम से होता है। नियम-7 (दो) में सेवा के सदस्यों की पदोन्नति द्वारा तथा नियम-7 (तीन) में स्थानांतरण/प्रतिनियुक्ति द्वारा भर्ती किया जाता है। सीधी भर्ती द्वारा भरे जाने वाले पदों पर चयन मेरिट के आधार पर होता है। उन्होंने बताया कि नियम के अनुसार सीधी भर्ती, प्रतियोगी परीक्षा अथवा चयन अथवा साक्षात्कार द्वारा होती है। सीधी भर्ती में आरक्षण अधिनियम 1994 तथा समय समय पर जारी निर्देश लागू होते हैं। शासकीय सेवकों को सामान्यतः वेतनमान के न्यूनतम पर 2 वर्ष की कालावधि के लिए परिवीक्षा पर नियुक्त किया जाता था। फेडरेशन का कहना है कि छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना 28 जुलाई 2020 द्वारा परिवीक्षा अवधि 2 वर्ष को संशोधित कर 3 वर्ष किया है। छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग के अधिसूचना 28 जुलाई 2020 के द्वारा छत्तीसगढ़ मूलभूत नियम 22 सी (1) के स्थान पर सीधी भर्ती के पदों पर चयनित शासकीय सेवकों के लिए 3 वर्ष परिवीक्षा अवधि के दौरान उस पद के वेतनमान के न्यूनतम का प्रथम वर्ष में 70 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष में 80 प्रतिशत तथा तृतीय वर्ष में 90 प्रतिशत स्टाइपेंड देने का प्रावधान प्रतिस्थापित किया गया है। फेडरेशन का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति, किसी प्रतियोगी परीक्षा, चयन अथवा साक्षात्कार द्वारा नहीं होता है। किसी चयन समिति द्वारा अभ्यर्थियों के सूची की अनुशंसा अथवा मेरिट के आधार पर चयन नहीं होता है। आरक्षण रोस्टर भी लागू नहीं होता है। जब अनुकंपा नियुक्ति में सीधी भर्ती की नियमित पद्धति लागू ही नहीं होती है, तो सीधी भर्ती के लिए प्रभावशील परिवीक्षा अवधि की शर्त बंधनकारी नहीं होनी चाहिये। गौरतलब है कि, जारी हो रहे अनुकंपा नियुक्ति आदेशों में परिवीक्षा अवधि एवं स्टाइपेंड को सेवा की अनिवार्य शर्तो में उल्लेख किया जा रहा है। फेडरेशन ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से इस मामले को संज्ञान में लेकर न्याय करने का अनुरोध किया है।
छ.ग.प्रदेश शिक्षक फेडरेशन राजनांदगाॅव के जिला अध्यक्ष मुकुल साव, जिला महामंत्री पी.आर.झाड़े, सदस्यगण बृजभान सिन्हा, एफ.आर.वर्मा, वाय.डी.साहू, जनक तिवारी, संजीव मिश्रा, भूषण लाल साव, रंजीत सिंह कुंजाम, जितेन्द्र बघेल, संगीता ब्यौहरे, नीलू झाड़े, सीमा तरार, अभिशिक्ता फंदियाल, मालती टंडन, सी.एल.चंद्रवंशी, देवचंद बंजारे, शिव प्रसाद जोशी, ईश्वर टंडन, अब्दुल कलीम खान, सोहन निषाद, मुकेश शुक्ला, एच.के.सोनसारवां, बी.के.गुप्ता एवं साथियो ने भी प्रांतीय पदाधिकारियों के इस अनुरोध का समर्थन किया है और अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों में सीधी भर्ती के लिए प्रभावशील परिवीक्षा अवधि एवं स्टाईपेंड की शर्तो को बंधनकारी नहीं करने की मांग की है।
